मध्यप्रदेश के लोग नर्मदा को यदि मैया कहते हैं तो नर्मदा भी एक मां के समान ही सदियों से यहां के लोगों का पालन-पोषण करती आई है। प्रदेश में अनूपपुर के अमरकंटक से लेकर आलीराजपुर के सोंडवा तक नर्मदा अपने 1077 किमी लंबे सफर के दौरान राज्य के 16 जिलों से होकर गुजरती है।
प्रदेश की 30 प्रतिशत से अधिक आबादी इसके आस-पास निवास करती है। लाखों लोगों को इससे अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलता है। आज इसका पानी प्रदेश के सबसे बड़े शहर इंदौर और भोपाल के लोगों की भी प्यास बुझा रहा है। कृषि, ऊर्जा, उद्योग,वनोपज और पर्यटन के जरिए सौंदर्य की इस नदी ने मध्यप्रदेश को समृद्धि भी खूब बांटी है।
नर्मदा घाटी परियोजना दुनिया की सबसे बड़ी नदी परियोजनाओं में से एक है। नर्मदा के पानी के अधिकतम और नियोजित इस्तेमाल के मकसद से सरकार ने 1981 में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, नर्मदा घाटी विकास विभाग एवं नर्मदा नियंत्रण मंडल का गठन कर प्रदेश में 29 बड़ी परियोजनाएं, 135 मध्यम परियोजनाएं एवं 3000 छोटी परियोजनाएं नर्मदा एवं उसकी सहायक नदियों पर बनाने का मास्टर प्लान तैयार किया था।
बड़ी परियोजनाओं में तवा, बारना, कोलार, सुक्ता, मटियारी, मान, शहीद चन्द्रशेखर आजाद,अवंती बाई लोधी सागर परियोजना,बरगी व्यपवर्तन परियोजना (बरगी दांयी तट नहर), इंदिरा सागर,ओंकारेश्वर,अपरवेदा, शहीद भीमा नायक सागर (लोअर गोई) एवं पुनासा परियोजनाएं शामिल हैं।
नर्मदा घाटी की विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं से 6 लाख 37 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता से ज्यादा का विकास हुआ है । 2025 तक इस परियोजना को पूरे किए जाने का लक्ष्य है। परियोजना के पूरे हो जाने पर करीब 15 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी और इससे लगभग 1648 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा।