प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तर्ज पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी आम आदमियों से जुड़ी चुनिंदा परियोजनाओं की समीक्षा के लिए प्रगति (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन) शुरू कर दी है। ये समीक्षा हर माह होगी।
इसमें मुख्यमंत्री विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से योजनाओं को लेकर सीधी बात करेंगे। इसके लिए उन्हें फीडबैक प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग यूनिट के लोग जुटाकर देंगे। मंगलवार को पहली बार प्रगति की बैठक हुई, जिसमें आधा दर्जन योजनाओं की समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री सचिवालय के उच्च पदस्थ अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने प्रगति की शुरुआत कर दी है। अब प्रमुख कार्यक्रम व योजनाओं की गहन समीक्षा लगातार होगी। हर माह आम आदमी से सीधे जुड़े कार्यक्रम और योजनाओं को लिया जाएगा।
बैठक से पहले सचिवालय के अधीन बनी प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग यूनिट के लोग संबंधित कार्यक्रम और योजनाओं का फीडबैक जुटाएंगे। इसके आधार पर मुख्यमंत्री अधिकारियों से सीधा सवाल-जवाब करेंगे। सूत्रों के मुताबिक इस प्रक्रिया का मकसद विधानसभा चुनाव से पहले बड़े कामों को पूरा करवाना है ताकि चुनाव प्रचार में ये बताया जा सके कि जो कहा था, वो किया।
इनकी की समीक्षा
मंगलवार को प्रगति की पहली बैठक में विदिशा में बन रहे अस्पताल, वल्लभ भवन (मंत्रालय) की एनेक्सी, सतना-बमीठा और रीवा-सिंगरौली सड़क, मोहनखेड़ा जलाशय, शहडोल का मेडिकल कॉलेज और तकनीकी शिक्षा विभाग के दो निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर माह चुनिंदा योजनाओं पर मुख्य सचिवों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीधी बात करते हैं। इस दौरान केंद्र के संबंधित अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहते हैं। राज्य अपनी प्रगति का ब्योरा रखते हैं और यदि कोई परेशानी आती है तो मुख्य सचिव उसे भी रखते हैं।
प्रधानमंत्री इसको लेकर मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश दे देते हैं। इसका फायदा ये हो रहा है कि जिन कामों की गति धीमी रहती थी, वो बैठक के कारण तेजी से होने लगे हैं।