व्यापमं फर्जीवाड़े के आरोपी पूर्व सिस्टम एनालिस्ट नितिन महिंद्रा और घोटले के मास्टमाइंड डॉक्टर जगदीश सागर ने परीक्षार्थियों को नकल कराने के लिए 15 करोड़ देकर 400 सॉल्वर तैयार किए थे। इन दोनों ने ये कारनामा साल 2012 और 2013 की पीएमटी परीक्षा में किया था। सीबीआई की पड़ताल में इस बात का खुलासा हुआ है।दावा किया जा रहा है कि सीबीआई ने इस फर्जीवाड़े के पीचेदे हिस्से इंजन-बोगी को लगभग सुलझा लिया है
दरअसल सीबीआई की भाषा में इंजन-बोगी वो मामला है जिसके तहत उन्हें इस बात का पता लगाना था कि परीक्षार्थियों के नकल कैसे कराई गई। व्यापमं के आरोपी अधिकारी पीएमटी परीक्षा में बैठक व्यवस्था इस तरह रखते थे कि साल्वर तय परीक्षार्थी के आगे या पीछे बैठे।
जानकारी के अनुसार मंहिद्रा और डॉ. सागर ने पीएमटी में पास करवाने की गारंटी लेते हुए वर्ग विशेष के हिसाब से सॉल्वर के रेट तय कर रखे थे। मसलन सामान्य, ओबीसी व अजा-अजजा के अभ्यर्थियों को पास करवाने के लिए सॉल्वर की फीस अलग अलग रखी गई । आरक्षित सीटों पर जहां दो लाख रुपए न्यूनतम लिए गए वहीं सामान्य सीटों के लिए आठ लाख रुपए तक वसूले गए।
सीबीआई द्वारा अब तक पड़के गए सॉल्वर्स से पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि महिंद्रा और सागर ने कई सॉल्वर को तो तय राशि के हिसाब से पैसा भी नहीं दिया गया। मलसन जिसे पांच लाख रुपए देना तय किया था उसे बस एक या दो लाख देकर चलता कर दिया। ऐसे सॉल्वर्स की संख्या 150 से ज्यादा है।
15 करोड़ रुपए की राशि अकेले पास करवाने वाले सॉल्वर को दी गई इसके अलावा इनका खुद का कमिशन कितना था, दलालों व अन्य को कितना दिया गया इसकी जांच भी अंतिम स्तर पर है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को अप्रैल माह तक इस फर्जीवाड़े को सुलझाने का टास्क दिया है। सूत्र बताते है कि 85 प्रतिशत जांच पूरी हो गई है। सीबीआई व्यापमं फर्जीवाड़े से जुड़े 145 मामलों की जांच कर रही है। इसमें 54 मामले अकेले पीएमटी से जुड़े। अब तक सीबीआई 60 मामलों में चालान पेश कर चुकी है।
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2013 में हुई पीएमटी के लिए 225 से ज्यादा सॉल्वर का इंतजाम किया गया तो वर्ष 2012 में 174 अभ्यर्थियों को पास करवाने का ठेका दोनों ने लिया। सॉल्वर तलाशने की पहली शर्त बस यही होती थी वो इंटेलिजेंट हो। ज्यादातर सॉल्वर यूपी, बिहार से लाए गए।
वहीं दिल्ली, गुजरात से भी कुछ सॉल्वर्स जुगाड़े गए। दोनों मामलों में अभ्यर्थियों, सॉल्वर, दलाल और अभिभावकों सहित वर्ष 2012 पीएमटी में 590 और वर्ष 2013 पीएमटी में कुल 750 नामजद आरोपी सीबीआई ने बनाए है। वहीं 125 ऐसे मुन्ना भाई भी हैं जिन्होंने फर्जी नाम पते पर पीएमटी परीक्षाएं दी उनमें से 90 सीबीआई को मिल चुके है। मालूम हो इस काम के लिए सीबीआई ने अमेरिकी जांच एजेंसी की मदद भी ली थी।