भाजपा कार्यसमिति की बैठक के दूसरे दिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने ही मंत्रियों व जनप्रतिनिधियों पर आग बबूला हो गए। बैठक से गैरहाजिर होने पर उन्होंने ऐसे लोगों को सीधे इस्तीफा देने की सलाह दे डाली।
शिवराज ने खुद का और प्रधानमंत्री का उदाहरण देते हुए कहा कि मेरी तबीयत खराब होने के बाद भी मैं दो दिन से यहां बैठा हूं। राष्ट्रीय कार्यसमिति में प्रधानमंत्री पूरे दो दिन रहते हैं। यदि सरकार के मंत्री और अन्य सदस्य बैठक में नहीं आ सकते तो इस्तीफा दे दें। हमारे बहुत सारे कार्यकर्ता उनकी जगह लेने के लिए बैठे हैं।
सीएम ने कहा कि भूपेंद्र सिंह की सूचना थी, गौरीशंकर बिसेन को हमने छिंदवाड़ा भेजा, लेकिन कई मंत्री नदारद हैं।गौरतलब है कि कार्यसमिति में कई मंत्री पहुंचे ही नहीं तो कुछ दूसरे दिन सुबह-सुबह निकल गए।
बैठक में नहीं आने वाले मंत्रियों में संजय पाठक, जयभान सिंह पवैया, ललिता यादव, ज्ञान सिंह, जयंत मलैया, विजय शाह, ओमप्रकाश धुर्वे, सुरेंद्र पटवा शामिल हैं। वहीं गोपाल भार्गव, नरोत्तम मिश्रा सहित कुछ सदस्य एक दिन बाद चले गए थे। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर भी बैठक में नहीं पहुंचे। हालांकि यह साफ नहीं है कि इन सभी ने सूचना दी थी या नहीं।
ज्योतिरादित्य सिंधिया पर बोला हमला, जमीन हड़पने वालों का आदर नहीं कर सकते
मुख्यमंत्री ने फिर कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया पर हमला बोलते हुए कहा कि राजमाता सिंधिया सिर्फ स्व. माधवराव सिंधिया की मां नहीं, लोकमाता थीं। मेरी भी मां थी। उनकी बेटी वसुंधरा और यशोधरा लोकनेता हैं, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे व्यक्ति को कभी राजमाता से मिलाने की बात मत करना, वे स्वार्थी हैं। शिवपुरी में ट्रस्ट की 700 एकड़ जमीन को हड़पकर व्यवसाय कर रहे हैं। उनके परिवार के लोग भी राजमाता के रास्ते पर नहीं चल सकते तो उन्हें आदर नहीं मिलेगा। सिंधिया परिवार पर मुख्यमंत्री का बयान एक तरह से डेमेज कंट्रोल की कोशिश मानी जा रही है।
बैठक में शिवराज के निशाने पर पूरे समय मंत्री ही रहे। शिवराज ने कहा कि मंत्री इसी सोच में रहते हैं कि टिकट नहीं मिलेगा तो क्या होगा। वे इसी नकारात्मक कल्पना में रहते हैं। जो कार्यकर्ता तेजी से उभरता हुआ दिखता है, उसे निपटाने की सोचने लगते हैं।