पन्ना टाइगर रिजर्व का बाघ शावकों की मृत्यु से इंकार

पन्ना पार्क प्रबंधन ने टाइगर रिजर्व में बाघ शावकों की मृत्यु से इंकार किया है। क्षेत्र संचालक श्री आर. श्रीनिवास मूर्ति का कहना है कि बाघ द्वारा अपने शावक का परित्याग एक स्वाभाविक प्रकृति है। कुशल सुरक्षा प्रबंधन के चलते पन्ना टाइगर रिजर्व के कुनबे को विश्व-स्तरीय गौरव हासिल हुआ है। यह गर्व एवं हर्ष की बात है कि महज 3 वर्ष की अल्पावधि में पन्ना टाइगर रिजर्व का बाघ कुनबा विन्ध्याचल के आधे क्षेत्र में फैल चुका है। दमोह से प्राप्त केमरा ट्रेप चित्रों से इस बात की पुष्टि हुई है कि दमोह में उपलब्ध बाघ पन्ना-121 है। इसके अलावा पन्ना 222 को चन्द्रनगर परिक्षेत्र (छतरपुर) में पहचान कर उसे रेडियो कॉलर पहनाया गया है।क्षेत्र संचालक ने बताया कि दिसम्बर, 2013 में पन्ना टाइगर रिजर्व में कम से कम 9 वयस्क एवं अर्ध-वयस्क नर बाघ थे। परन्तु जनवरी-फरवरी में हुई असमय वर्षा के कारण 5 अर्द्ध-वयस्क बाघ पन्ना-411, 412, 121, 122 एवं 123 के टाइगर रिजर्व से बाहर निकलने के प्रमाण मिले हैं। इनके अलावा एक वयस्क बाघ पन्ना-212 ने संजय टाइगर रिजर्व की ओर रुख किया है। अर्द्ध-वयस्क बाघों के कॉरीडोर में स्वछंद विचरण को लेकर अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक की अध्यक्षता में बनी टास्क फोर्स इन बातों का बराबर ध्यान रखती है।

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