जिला गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा प्रदेश के ग्रामीण अँचलों में गठित महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।
समूहों के गठन के बाद ग्रामीण महिलाओं ने अपने परिवारों की आर्थिक दशा को बदला है। ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को रोजगार मुहैया कराने में भी इन समूहों की भूमिका रही है। प्रदेश में अब तक 70 हजार से अधिक स्व-सहायता समूह से लाखों गरीब ग्रामीण परिवार को जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की कोशिशें जारी हैं। राजगढ़ जिले के ब्यावरा बाय-पास के पास ग्राम मोई की महिलाओं ने 8 समूह के जरिये छोटी-छोटी बचत से 81 हजार रुपये जमा कर लिये हैं। इस छोटे से गाँव में 328 परिवार रहते हैं। इन समूहों को डी.पी.आई.पी. द्वारा 11.92 लाख रुपये का कर्ज मुहैया कराया गया। अब तक 18 लाख 71 हजार से अधिक राशि का कर्ज इन समूहों को मिला। महिलाओं ने समूहों से ऋण लेकर भैंस-बकरी पालन और अन्य गतिविधियाँ शुरू कर अपनी स्थिति को बेहतर बनाया है। ये सभी कर्ज को समय पर चुका रही हैं और कर्ज की दूसरी किश्त लेकर गतिविधियों का विस्तार भी कर रही हैं।
स्व-सहायता समूहों की महिलाएँ ग्राम सभा में भी भागीदारी करती हैं। इनके प्रयासों से ही गाँव में नल-जल योजना साकार हुई है। महिलाओं ने खुले में शौच की बुराई को मिटाने के लिये अपने घरों में शौचालय बनवाये हैं। इन महिलाओं के चेहरों पर आत्म-विश्वास साफ दिखता है। यह बदलाव आस-पास के कई ग्रामों की महिलाओं के लिये भी प्रेरणादायक सिद्ध हुआ है।