अमरीका के, २०१० में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी-एन एस ए को भाजपा की जासूसी के लिए अधिकृत करने की खबरों के मद्देनजर भारत ने, नई दिल्ली में अमरीका के एक वरिष्ठ राजनयिक को बुलाकर विरोध दर्ज किया है।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत ने कहा है कि यह कार्रवाई अस्वीकार्य है। अमरीका से यह आश्वासन देने को कहा गया है कि फिर कभी ऐसा नहीं होगा। एन एस ए के पूर्व कांट्रेक्टर एडवर्ड स्नोडेन के खुलासे के बाद यह मामला सामने आया था। एक अमरीकी अखबार ने सोमवार को सार्वजनिक हुए एक दस्तावेज के हवाले से लिखा कि अमरीका ने एन एस ए को कुछ विदेशी राजनीतिक दलों की जासूसी करने को कहा था। इस सूची में भारत का नाम भी शामिल था। इसके अलावा लेबनान की अमाल, मिस्र की मुस्लिम ब्रदरहुड और पाकिस्तान की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का भी नाम था। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि एनएसए ने भाजपा की जासूसी की थी या नहीं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन ने कल इन खबरों को बहुत गंभीर बताया था। उन्होंने कहा कि किसी भी भारतीय नागरिक या संगठन की निजता पर हमला स्वीकार नहीं किया जा सकता।