मतदाता-सूची के कार्य से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी द्वारा पदीय कर्त्तव्य भंग करने पर उसे दो वर्ष तक का कारावास हो सकता है। ऐसे प्रकरण में जब तक कि राज्य निर्वाचन आयोग या संबंधित जिले के कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी या उसके अधीन प्राधिकार
से परिवाद न किया जाये, कोई भी न्यायालय संज्ञान के बिना, दण्ड देने के लिये सक्षम नहीं होगा। सचिव, राज्य निर्वाचन आयोग श्री जी.पी. श्रीवास्तव ने बताया है कि फोटोयुक्त मतदाता-सूची की तैयारी से जुड़े रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी या कोई व्यक्ति, जो मतदाता-सूची की किसी ऐसी प्रविष्टि के पुनरीक्षण अथवा उसमें सुधार के संबंध में, जो उसमें सम्मिलित की जाना है या उसमें सुधार के संबंध में, जो उसमें सम्मिलित की जाना है या उससे अपवर्जित की जाना है, अपने ऐसे पदीय कर्त्तव्यों को भंग करता है जिनका कि उक्त अधिनियम के उपबंधों के अधीन उसके द्वारा निर्वहन किया जाना है, तो वह उस दशा में, जहाँ कि किसी कृत्य का ऐसा भंग या लोप बिना किसी युक्तियुक्त कारण के किया गया हो, जुर्माने सहित कारावास से जो तीन माह से कम का नहीं होगा किन्तु जो दो वर्ष तक का हो सकेगा, दण्डित किया जायेगा। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा फोटोयुक्त मतदाता-सूची समय पर एवं त्रुटि-रहित बनवाने के लिये आवश्यकतानुसार इस प्रावधान के तहत कार्यवाही करने के निर्देश जिला निर्वाचन अधिकारी को दिये गये हैं।