इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर सिंचाई परियोजना नहरों का निरीक्षण करते हुए नर्मदा घाटी विकास राज्य मंत्री श्री लालसिंह आर्य ने इंजीनियरों को सचेत किया कि नहरों के निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी सहन नही की जायेगी।
प्रदेश की इन दो महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजनाओं की नहर प्रणाली का निर्माण अपेक्षित गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाना सुनिश्चित करें। श्री आर्य शनिवार को इन परियोजनाओं की नहरों के दो दिवसीय सघन निरीक्षण पर खरगोन और बडवानी जिलों में थे। श्री आर्य उन दूरस्थ दुर्गम अंचलों में गये जहाँ नहरों के निर्माण कार्य चल रहे हैं। उन्होंने क्षेत्र के किसानों से भी चर्चा की। ज्ञात हो कि इंदिरा सागर की 248 किलोमीटर मुख्य नहर तथा ओंकारेश्वर परियोजना की 163 किलोमीटर लंबी दाँयी और 64 किलोमीटर लंबी बाँयी नहर निर्माणाधीन है। इंदिरा सागर परियोजना की मुख्य नहर का 65 प्रतिशत और ओंकारेश्वर परियोजना की मुख्य नहर का 70 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। इंदिरा सागर परियोजना से 1 लाख 23 हजार हेक्टेयर और ओंकारेश्वर परियोजना से 1 लाख 47 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता निर्मित होगी। इंदिरा सागर परियोजना से खरगोन, बड़वानी और खण्डवा जिले तथा ओंकारेश्वर परियोजना से खरगोन, धार और खण्डवा जिलों में सिंचाई होगी। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष श्री रजनीश वैश ने नहरों के निर्माण कार्यों से संबंधित जानकारी से श्री आर्य को अवगत करवाया। श्री आर्य ने दोनों परियोजना के मुख्य अभियन्ताओं/अधीक्षण यंत्रियों तथा कार्यपालन यंत्रियों के साथ नहर निर्माण की प्रगति तथा अन्य संबंधित पक्षों की समीक्षा की। श्री आर्य ने कहा कि वर्ष 2015-16 के अंत तक इन परियोजनाओं की नहर प्रणाली का निर्माण पूर्ण कर किसानों को सिंचाई सुनिश्चित की जाये।