मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने वन एवं पर्यावरण से संबंधी अधिनियमों के परीक्षण और समीक्षा के लिये गठित उच्च-स्तरीय समिति के विचारार्थ मध्यप्रदेश द्वारा भेजे गये सुझावों की ओर
वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रकाश जावड़ेकर का ध्यान आकर्षित किया है। यह सुझाव मुख्य सचिव श्री अन्टोनी डीसा द्वारा श्री टी.एस.आर. सुब्रमण्यम की अध्यक्षता में गठित समिति को भेजे गये हैं। मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा है कि यह मुद्दे मध्यप्रदेश के लिये बहुत महत्वपूर्ण हैं। समिति को यह सुझाव भेजा गया है कि वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 में स्थानीय विकास और वाणिज्यिक गतिविधियों के बीच भेद किया जाना चाहिए। यह सिर्फ भारतीय वन अधिनियम 1927 में घोषित आरक्षित और संरक्षित भवनों पर ही लागू होने चाहिए। इसी तरह वन्य-प्राणी (संरक्षण) अधिनियम 1972 में प्राधिकरणों को दिये गये अधिकार संविधान की संघीय संरचना के अनुरूप होने चाहिए। इस तथा अन्य पहलु पर विचार करने की आवश्यकता है।