“हाऊसिंग फॉर ऑल-2022” के हितग्राहियों की चयन-प्रक्रिया निर्धारित

राज्य शासन ने जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन, एकीकृत आवास एवं मलिन बस्ती विकास कार्यक्रम, राजीव आवास और भारत सरकार की नयी योजना ‘हाऊसिंग फॉर ऑल-2022’ में गरीबों की आवासीय योजना

के लिए चयन-प्रक्रिया निर्धारित की है। हितग्राहियों की चयन-प्रक्रिया के संबंध में पूर्व में जारी निर्देशों को निरस्त कर नये निर्देश जारी किये गये हैं।

नगरपालिक निगमों के आयुक्त, नगरपालिका और नगर परिषद् के मुख्य नगरपालिका के अधिकारियों को सर्वेक्षण, हितग्राही की चयन-प्रक्रिया, पहचान, आवासों का आवंटन आदि के संबंध में कार्यवाही करने को कहा गया है। हितग्राही के चयन के लिए बस्ती का पूर्ण सर्वेक्षण करवाकर चतुर्सीमा के चिन्हांकन के निर्देश दिये गये हैं। सर्वेक्षण के लिए गठित दल अंतर्विभागीय होगा। दल का प्रमुख नगरीय निकाय के अधिकारी एवं कर्मचारी को नियुक्त करने को कहा गया है। यह दल चयनित बस्ती के निवासियों की समिति बनाकर उनकी सहभागिता से विस्तृत सर्वे करेगा। प्रत्येक आवास एवं परिवार को एक नम्बर देकर प्रारंभिक सूची तैयार की जायेंगी। संबंधित जोनल अधिकारी सूची का प्रकाशन करवाकर दावा-आपत्ति आमंत्रित करेंगे। इसके लिए 15 दिन का समय देकर उनका निराकरण अगले 7 दिन के भीतर किया जायेगा। समिति या नियुक्त अधिकारी द्वारा अंतिम सूची तैयार की जायेंगी, जिसकी स्वीकृति मेयर-इन-काऊन्सिल/प्रेसिडेंट-इन-काऊन्सिल द्वारा दी जायेंगी। जिला कलेक्टर सूची को सत्यापित करने के बाद अंतिम अनुमोदन करेंगे। सूची का प्रकाशन बस्ती, निकाय कार्यालय और वेबसाइट पर किया जायेगा।

हितग्राहियों की पहचान

हितग्राहियों की पात्रता के लिए पूर्ण मलिन बस्ती का व्यवस्थापन एवं हाऊसिंग फॉर ऑल योजना के आधार पर सर्वे किया जायेगा। सर्वेक्षण के समय हितग्राही को बस्ती में निवासरत होना चाहिये। निवास के समर्थन में अभिलेख जैसे पट्टा, राशन कार्ड, मतदाता परिचय-पत्र, ड्रायविंग लायसेंस, आधार कार्ड, बिजली का बिल, बेंक पास-बुक, निकाय को देय कर संबंधी प्रमाण-पत्र, निर्वाचक नामावली, श्रमिक कर्मकार परिचय-पत्र, गरीबी रेखा की सूची, कामकाजी महिला, हाथ ठेलाधारियों के परिचय-पत्र में से किसी एक की सत्यापित प्रति शपथ-पत्र के साथ मान्य होंगी। प्रत्येक परिवार को पृथक से हितग्राही होने की पात्रता होगी। आवास/ झुग्गी में एक से अधिक विवाहित परिवार के निवास करने पर प्रत्येक परिवार को भी हितग्राही की पात्रता होगी। हितग्राही मध्यप्रदेश का मूल-निवासी होना चाहिये। उसका किसी शहरी क्षेत्र में कोई रिहायशी भू-खण्ड या मकान नहीं होना चाहिये। शहरी गरीबी रेखा की सूची में पंजीकृत अथवा कमजोर आय वर्ग के परिवार पात्रता की श्रेणी में आ सकेंगे। सर्वे के समय दुकानों के पाये जाने पर उनका हाकर्स कॉर्नर/पेटी शापिंग में व्यवस्थापन किया जायेगा। जो रहवासी योजना में शामिल होना नहीं चाहेंगे, उनका अन्य स्थान पर व्यवस्थापन के लिए विचार किया जायेगा। योजना पूर्ण होने पर हितग्राही यदि बस्ती में निवासरत नहीं होगा तो उसको चयनित सूची से अलग कर दिया जायेगा तथा उसे आवास आवंटन की पात्रता नहीं होगी। हितग्राही की मृत्यु होने की स्थिति में आवास पाने की पात्रता उसके उत्तराधिकारी को होगी।

आवासों का आवंटन

हितग्राहियों को अस्थायी आवंटन आदेश लाटरी द्वारा जारी किये जायेंगे। जो हितग्राही अंशदान की राशि निकाय द्वारा सूचित की गई समयावधि में जमा करवायेंगे, उन्हें आवंटन आदेश जारी कर लीज डीड का निष्पादन पंजीयन द्वारा किया जायेगा। लाटरी की प्रक्रिया में परिवार के विकलांग सदस्य/ 60 वर्ष से अधिक आयु के वृद्ध मुखिया के लिए प्रमाण-पत्र के आधार पर भू-तल पर आवास आरक्षित रखे जायेंगे। कब्जा लेने के पश्चात रहवासी समिति गठित होगी। कब्जे के पहले आधार कार्ड प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। आपसी सहमति से आवासों को बदलने के इच्छुक परिवारों को भी मौका दिया जायेगा। उपलब्ध भवनों की तुलना में आवेदकों की संख्या अधिक होने पर लाटरी पद्धति से आवंटन होगा। चयन-सूची के साथ 10 प्रतिशत हितग्राहियों की प्रतीक्षा-सूची बनाई जायेंगी। चयनित हितग्राहियों आवासीय इकाइयों का न्यूनतम 15 वर्ष के लिए लीज डीड का पंजीयन पति एवं पत्नी के संयुक्त नाम से किया जायेगा। लीज डीड बेंक अथवा किसी अन्य वित्तीय संस्था के पास ऋण के पुनर्भुगतान की अवधि के लिए बंधक रखें जा सकेंगे। आवंटित आवास का उप-पट्टा, विक्रय-पत्र, दान-पत्र, मुख्तारनामा या किसी भी रीति से हस्तांतरण प्रतिबंधित रहेगा। ऐसा पाये जाने पर आवास को नगरीय निकाय द्वारा अपने आधिपत्य में ले लिया जायेगा।

इन योजनाओं के क्रियान्वयन में विकास प्राधिकरण, गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल जैसी संस्थाएँ भी निर्देशों का पालन नगरीय निकायों के समान करेगी। विशेष परिस्थितियों में जिला कलेक्टर आवश्यक निर्णय ले सकेंगे।

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