केन्द्रीय विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए मौजूदा अकादमिक सत्र में जर्मन की जगह संस्कृत की परीक्षा देना अनिवार्य नहीं होगा। केन्द्र सरकार ने आज उच्चतम न्यायालय में यह बताते हुए कहा कि विद्यार्थी जर्मन
या संस्कृत ले सकते हैं। न्यायालय ने केन्द्र सरकार के प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि यह अच्छा समाधान है और इससे विद्यार्थियों पर बोझ नहीं पड़ेगा। उच्चतम न्यायालय ने आज संबंधित विद्यार्थियों के अभिभावकों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की। याचिका में कहा गया था कि सरकार को, विशेष रूप से वर्तमान अकादमिक सत्र के बीच जर्मन भाषा को हटाने का निर्णय नहीं थोपना चाहिए। केन्द्र सरकार ने केन्द्रीय विद्यालयों में कक्षा छह से आठ के लिए तीसरी भाषा के रूप में संस्कृत के विकल्प के रूप में जर्मन भाषा को हटाने का निर्णय लिया था, जिसके बाद विवाद पैदा हो गया था।