अंग्रेजी ही सब कुछ है का भ्रम दूर करें। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने यह बात अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय में चिकित्सा एवं अभियांत्रिकी पाठ्य-सामग्री लेखन कार्यशाला में कही। कार्यशाला दो दिन चलेगी।
श्री गुप्ता ने कहा कि सिर्फ कार्यशाला नहीं परिणाममूलक कार्य करें। उन्होंने कहा कि हिन्दी में पढ़ाई करवाना जिद नहीं है, सिर्फ विद्यार्थियों की सहूलियत के लिये हिन्दी में पाठ्यक्रम बनाये जा रहे हैं। श्री गुप्ता ने कहा कि कोई भी पाठ्यक्रम विद्यार्थियों के ऊपर थोपा नहीं जायेगा। विद्यार्थी अपनी इच्छानुसार पाठ्यक्रम का चयन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दी में चिकित्सा एवं अभियांत्रिकी पाठ्य-सामग्री तैयार करने के लिये चरणबद्ध कार्यक्रम बनायें। श्री गुप्ता ने कहा कि शासन इस कार्य में पूरा सहयोग करेगा।
वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग, दिल्ली के अध्यक्ष प्रो. के.एल. वर्मा ने कहा कि हिन्दी में पाठ्यक्रम तैयार करने में वे तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग करेंगे। उन्होंने बताया कि 100 विषय की ग्लोसरी आयोग के पास उपलब्ध हैं। प्रो. वर्मा ने बताया कि आयोग द्वारा शोध-पत्र भी प्रकाशित किये जाते हैं। आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलपति डॉ. डी.पी. लोकवानी ने कहा कि अगर डॉक्टर मरीजों से हिन्दी में बात करते हैं, तो वह हिन्दी में पढ़ाई भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम उपलब्ध पुस्तकों का अनुवाद किया जाना चाहिये।