1993 के मुम्बई बम विस्फोटों में फांसी के एकमात्र सजायाफ्ता याकूब मेमन को नागपुर केन्द्रीय जेल में आज सुबह लगभग सात बजे फांसी दे दी गयी है। महाराष्ट्र के अपर मुख्य सचिव, गृह के पी बक्शी ने मीडिया से बातचीत करते हुए फांसी दिए जाने की पुष्टि की। उच्चतम न्यायालय की तीन सदस्यों की पीठ ने आज तड़के सुनवाई करते हुए फांसी पर रोक लगाने के मेमन के अनुरोध को रद्द कर दिया था।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कल शाम गृहमंत्री राजनाथ सिंह से परामर्श के बाद याकूब मेमन की दया याचिका ठुकरा दी थी। इसके बाद उसके वकीलों ने देर रात उच्चतम न्यायालय में एक और याचिका दायर कर फांसी पर रोक लगाने का अनुरोध किया। याचिका में कहा गया था कि उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देश के अनुसार, दया याचिका खारिज होने के बाद याकूब मेमन को कम से कम 14 दिन का वक्त दिया जाना चाहिए। उच्चतम न्यायालय की तीन सदस्यों की पीठ ने इस याचिका पर आज तड़के विशेष सुनवाई करते हुए उसके वकीलों की दलील को ठुकरा दिया। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, अमिताव राय और प्रफुल्ल चन्द्र पंत की पीठ ने कहा कि पहली दया याचिका ठुकराए जाने के बाद उसको काफी मौके दिये गए। पीठ ने कहा कि डेथ वारंट पर रोक लगाना न्याय का मजाक होगा। पीठ ने कल भी फांसी पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था। महाराष्ट्र के राज्यपाल विद्यासागर राव ने भी उसकी दया याचिका कल खारिज कर दी थी। नागपुर में कानून व्यवस्था की किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। याकूब मेमन के फांसी होने पर देश के वित्तीय राजधानी में कड़ी सुरक्षा रखी गई है। मुंबई पुलिस आयुक्त राकेश मार्या ने जानकारी दी है कि एसआरपीएफ के तीस हजार जवान मुंबई के संवेदनशील इलाकों में तैनात किये गये हैं। शहर के सभी इलाकों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्थिति तथा कानून व्यवस्था पर नजर बनाये हुए हैं। याकूब मेमन के घर अल हुसैनी के बाहर भी बड़ी मात्रा में पुलिस तैनात है। ऐहतियात के तौर पर पुलिस ने कल शहर से लगभग पांच सौ लोगों को हिरासत में लिया है। फांसी के बाद याकूब मेमन का शव उसके परिवार को सौंपा जायेगा तथा दफनाने के लिए उसे मुंबई लाया जायेगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस आज सुबह 11 बजे विधानसभा में याकूब के फांसी पर बयान देंगे।