पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम का उनके गृह नगर रामेश्वरम में भारत माता की जय के नारों के बीच पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ आज अंतिम संस्कार किया गया। डॉक्टर कलाम का सोमवार को शिलांग में हृदयाघात से निधन हो गया था। हजारों लोगों ने दिवंगत राष्ट्रपति को अंतिम विदाई दी।
देश के लाखों युवाओं को नींद उड़ाने वाले बडे सपने देखने के लिए प्रोत्साहित करने वाले मार्गदर्शक को आज उसकी माटी की गोद में सुला दिया गया। अंतिम संस्कार में उमड़े हजारों लोग डॉ. कलाम को उसी श्रद्धा के साथ अंतिम प्रणाम करने रामेश्वरम पहुंचे जैसे वे वहां तीर्थ करने जाते हैं। पारिवारिक मस्जिद में नमाज ए जनाजा के बाद डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम को पेइकरम्बू में लॉस्ट पोस्ट की धुन और तोपों की सलामी के साथ पूरे सैनिक सम्मान से दफनाया गया। हवा में तोपों के साथ भारत माता की जय के नारे गूंज रहे थे। जनता ने भारत को अंतरिक्ष प्रक्षेपण और परमाणु तकनीक से संपन्न गिने-चुने देशों में स्थान दिलाने वाले एक प्रमुख प्रणेता डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम को अंतिम प्रणाम किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित अनेक गण्यमान्य लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए।
श्री मोदी ने पुष्पचक्र अर्पित किया और तिरंगे झंडे में लिपटे डॉ0 कलाम के पार्थिव शरीर के समक्ष मौन खड़े होकर उन्हें अंतिम विदाई दी। बाद में प्रधानमंत्री ने डॉक्टर कलाम के 99 वर्षीय बड़े भाई मोहम्मद मुथु मीरान लेबाई मराइकर से मिलकर उनके प्रति सम्वेदना प्रकट की। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी डॉक्टर कलाम के अंतिम संस्कार में शामिल थे। तमिलनाडु, केरल और मेघालय के राज्यपाल, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, एम0 वैंकयानायडू और तमिलनाडु के वित्तमंत्री ओ0 पन्नीरसेल्वम सहित अनेक नेता इस अवसर पर मौजूद थे। अन्य लोगों सहित कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, कर्नाटक, केरल और आन्ध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री तथा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता वी0 एस0 अच्युतानन्दन ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने भी अपने पूर्व सुप्रीम कमांडर को श्रद्धांजलि अर्पित की। 83 वर्षीय वैज्ञानिक डॉ कलाम की अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने उन्हें अश्रुपूर्ण विदाई दी। देश-विदेश से डॉक्टर कलाम के प्रति सम्वेदना प्रकट की जा रही है। अनेक गण्यमान्य लोगों की मौजूदगी के मद्देनजर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गये। नौसेना, तटरक्षक बल और सागरीय पुलिसकर्मियों को समुद्र में तैनात किया गया था।