राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सी.बी.सी.एस. लागू

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सुझाव एवं यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन के दिशा-निर्देश पर च्वाइस बेस क्रेडिट सिस्टम (सी.बी.सी.एस.) के जरिये उच्च शिक्षा देने वाला राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मध्यप्रदेश का पहला विश्वविद्यालय बन गया है।

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने आज इसका शुभारंभ किया। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री प्रो. रामशंकर कठेरिया ने भी सी.बी.सी.एस. शुरू करने पर विश्वविद्यालय को बधाई दी है

श्री गुप्ता ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्र में जाकर सी.बी.सी.एस. के बारे में जानकारी दें। उन्होंने कक्षा में विद्यार्थियों की कम उपस्थिति पर चिंता व्यक्त की। श्री गुप्ता ने कहा कि विद्यार्थी को जब कक्षा में कुछ अतिरिक्त सीखने को मिलेगा, तभी वह आयेगा। उन्होंने कहा कि चर्चा के बाद जो सुझाव आयें उन्हें भी सिस्टम में शामिल करें। तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि कॉलेज में नाम पट्टिका अंग्रेजी के साथ ही हिन्दी में भी लगायें।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पियूष त्रिवेदी ने बताया कि सी.बी.सी.एस. प्रणाली से छात्र अपनी प्रतिभा एवं अकादमिक क्षमता के अनुसार विषयों का चयन अपनी मर्जी से कर सकते हैं। सी.बी.सी.एस. शिक्षा के क्षेत्र में उदारीकरण और वैश्वीकरण के साथ पाठ्यक्रम के तालमेल को बनाये रखता है। सी.बी.सी.एस. छात्रों द्वारा अर्जित क्रेडिट के हस्तांतरण की सुविधा के साथ-साथ दुनिया भर में फैले विभिन्न शिक्षण संस्थानों में अपनी पढ़ाई जारी रखने की छात्रों को मोबिलिटी प्रदान करता है।

सी.बी.सी.एस. न केवल छात्रों के विकल्पों पर आधारित है, अपितु यह संस्थानों को पाठ्यक्रम के चयन में स्वायत्तता प्रदान करता है, जिसमें वह नई सी.बी.सी.एस. योजना के साथ आगे जाने के लिये पुराने पेटर्न को जारी रखने को स्वतंत्र होंगे। छात्रों की पसंद पर आधारित ओपन लर्निंग वातावरण सुनिश्चित करने वाली इस प्रणाली से सभी श्रेणी के छात्र-छात्राएँ लाभान्वित होंगे।

इस प्रणाली के आधार पर छात्र अपनी पसंद के अनुसार पाठ्यक्रम का चयन कर पायेगा। यह प्रणाली सेमेस्टर आधारित होगी एवं इसमें छात्र को डिग्री पाने के लिये अभी 252 क्रेडिट्स की अपेक्षा कुल 180 क्रेडिट अर्जित करने होंगे। यह 180 क्रेडिट्स विभिन्न भागों में विभाजित होंगे, जिसमें छात्रों को केवल एक ही दिशा में न जाते हुए कई प्रकार के विषयों को पढ़ने का पूरा मौका मिलेगा। इसमें छात्रों को प्रत्येक सेमेस्टर में न्यूनतम 16 क्रेडिट के विषयों को लेना होगा। अगले वर्ष में पढ़ने के लिये उसे पिछले वर्ष में न्यूनतम 22 क्रेडिट अर्जित करने होंगे। इस प्रकार 180 में से 90 क्रेडिट मूल विषय इलेक्टिव पाठ्यक्रम के अध्ययन से एवं शेष 90 क्रेडिट बेसिक साइंस, इंजीनियरिंग साइंस एवं अन्य क्षेत्रों पर आधारित पाठ्यक्रम के अध्ययन के होंगे।

 

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