पशुपालन मंत्री सुश्री कुसुम महदेले ने भारत सरकार से मध्यप्रदेश में कम से कम चार और वेटनरी कॉलेज खोलने की स्वीकृति देने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि करोड़ों पशुओं की संख्या को देखते हुए महू, जबलपुर और रीवा के अलावा चार विभिन्न क्षेत्र में वेटनरी कॉलेज की आवश्यकता महसूस की जा रही है। सुश्री महदेले आज प्रशासन अकादमी में भारत सरकार और मध्यप्रदेश के पशुपालन विभाग द्वारा जुगाली करने वाले छोटे पशुओं पर आधारित ‘आजीविका के सुदृढ़ीकरण” कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं। कार्यशाला में भारत सरकार के संयुक्त सचिव पशुपालन श्री संजय भूसरेड्डी, संयुक्त आयुक्त (कुक्कुट) डॉ. पी. ब्लावर, साउथ एशिया प्रो- पुअर लाइवस्टॉक पॉलिसी प्रोग्राम की टीम लीडर सुश्री वर्षा मेहता भी उपस्थित थी।
सुश्री कुसुम महदेले ने कहा कि भारत सरकार ग्रामीण गरीब पशु-पालकों की आय बढ़ाने के उपायों को साकार करने के लिये मध्यप्रदेश को और अधिक वित्तीय सहायता मुहैया करवाये। उन्होंने कहा कि ग्रामीण पशु-पालकों की माली हालत सुधारने के लिये सभी को मिलकर प्रयत्न करने होंगे। इसके लिये पशुपालन को बढ़ावा और प्राथमिकता देने के साथ ही वैज्ञानिक तथा आधुनिक तकनीक को भी अपनाना होगा। पशुपालन के क्षेत्र में शोध और अनुसंधान हो तथा उसका लाभ पशु-पालकों को मिले, यह सुनिश्चित करना होगा। सुश्री महदेले ने कहा कि पशु चिकित्सा विज्ञान का जितना फायदा पशु-पालकों को मिलेगा, उतना उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आयेगा। यदि भविष्य में पशु चिकित्सा महाविद्यालय खोले जाते हैं, तो उसमें छोटे जिलों को प्राथमिकता मिलना चाहिये। उनहोंने कहा कि नेशनल पार्क का उपयोग छोटे पशुओं के लिये भी होना चाहिये।