नवधान्य पर्यावरणविद् डॉ. वन्दना शिवा ने कहा है कि जैव-विविधता बचा कर और जैविक खेती कर दो भारत की पैदावार बराबर खाद्यान्न पैदा किया जा सकता है। डॉ. शिवा ‘ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन : समाधान की ओर’ विषय पर विधानसभा में हुई संगोष्ठी के विशेष सत्र में बोल रही थी। डॉ.शिवा ने कहा कि पंच-महाभूत के संतुलन को समझना पड़ेगा। इसी की कमी से ऋतु असंतुलन हुआ है। डॉ. शिवा ने कहा कि वर्तमान में जो विकास मॉडल अपनाया जा रहा है, वही ऋतु असंतुलन का कारण है। पंचतत्व ही पृथ्वी को चला रहे हैं। इनकी कमी से आने वाले समय में समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
डॉ. वन्दना शिवा ने कहा कि प्रदूषण को रोकने के लिये पौधे लगाकर ही पर्यावरण को कुछ हद तक बदला जा सकता है। इसी के दूरगामी परिणाम से भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शांति पाठ में लिखा है कि जल, थल, अंतरिक्ष, वन्य वृक्ष, औषधि, वनस्पति, ब्रह्माण्ड सहित सभी जगह शांति हो।
केरल के जैव-विविधता बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष श्री वी.एस. विजयन ने कहा कि मध्यप्रदेश को जैविक खेती क्रियान्वित कर दुनिया को बतानी चाहिये। उन्होंने कहा कि जीडीपी आधारित विकास नीति ही ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण है। श्री विजयन ने कहाकि जिसे हरित क्रांति कहा जा रहा है वह वास्तविकता में रसायनिक क्रांति है।
किसान श्रीमती कमला बाई ने अपने अंदाज और अपनी भाषा में किसानों से देशी बीज, देशी खाद और देशी खेती को अपनाने की अपील की।
इस मौके पर आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री अनिल माधव दवे, विधानसभा अध्यक्ष श्री सीतासरण शर्मा, नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री श्री लाल सिंह आर्य और पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस सहित सुधी श्रोता मौजूद थे।