मानव जगत की एक सबसे बड़ी खोज करते हुए अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने पहली बार गुरूत्वाकर्षण तरंगों की झलक पाने का दावा किया है। प्रख्यात वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने 1916 में अपने सामान्य सापेक्षता सिद्धांत का प्रतिपादन करते हुए इन तरंगों के होने की बात कही थी। वैज्ञानिकों ने कल कहा कि लगभग एक अरब 30 करोड़ साल पहले अंतरिक्ष में दो ब्लैक होल टकराए थे। इन दो ब्लैक होल के मिलन से उठी विशाल तरंग अंतरिक्ष में फैलती हुई 14 सितम्बर 2015 को पृथ्वी तक आ पहुंची। अमरीका में दो भूमिगत अति संवेदी उपकरणों ने इस तरंग को महसूस किया। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस खोज से दूर के सितारों, आकाश गंगाओं और ब्लैक होल सहित ब्रह्मांड के रहस्यों के बारे में अहम जानकारी जुटाने में मदद मिल सकती है।
आइंस्टीन ने कहा था कि अंतरिक्ष समय एक जाल की तरह है, जो किसी पिंड के भार से झुकता है, जबकि गुरूत्वाकर्षण तरंगें किसी तालाब में कंकड़ फेंकने से उठी लहरों की तरह है।
गुरूत्वाकर्षण तरंगों का पता दो भूमिगत डिटेक्टरों की मदद से लगाया गया जो बेहद सूक्ष्म तरंगों को भी भांप लेने में सक्षम हैं। इस योजना को लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रैवीटेशनल वेव ऑब्जर्वेटरी यानी लिगो नाम दिया गया है। वैज्ञानिकों को इन तरंगों से संबंधित आंकड़ों की पुष्टि में कई महीने लग गये। गुरूत्वाकर्षण तरंगें अंतरिक्ष के फैलाव का एक मापक हैं। ये विशाल पिंडों की गति के कारण होती हैं और प्रकाश की गति से चलती हैं। इन्हें कोई चीज रोक नहीं सकती। आइंस्टाईन ने कहा था कि अंतरिक्ष समय एक जाल की तरह है, जो किसी पिंड के भार से झुकता है, जबकि गुरूत्वाकर्षण तरंगें किसी तालाब में कंकड़ फेंकने से उठी लहरों की तरह है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों को इस खोज के लिए बधाई दी है। ट्वीटर पर उन्होंने कहा कि इस समय विश्व में दो लीगो डिटेक्टर हैं, जिसमें से एक अमरीका और एक जापान में है। उन्होंने ने घोषणा की कि तीसरा लीगो डिटेक्टर भारत में स्थापित किया जाएगा।