लांसनायक हनुमनतप्‍पा कोप्‍पड़ ने कल नई दिल्‍ली में अंतिम सांस ली।

सियाचिन के जांबाज लांसनायक हनुमनतप्‍पा कोप्‍पड़ का अंतिम संस्‍कार आज कर्नाटक में हुबली में पूर्ण राजकीय और सैन्‍य सम्‍मान के साथ उनके पैतृक गांव बेत्‍तादुर में किया जाएगा। अंतिम दर्शनों के लिए 33 वर्षीय शहीद का पार्थिव शरीर नेहरू मैदान में रखा गया है। मुख्‍यमंत्री सिद्दरमैया और उनके मंत्रिमंडल सहयोगी, विपक्ष के नेता जगदीश शेट्टर और सांसद प्रह्लाद जोशी ने कल हुबली में लांसनायक हनुमनतप्‍पा को श्रद्धासुमन अर्पित किए। लांसनायक कोप्‍पड़ ने कल नई दिल्‍ली में अंतिम सांस ली। सियाचिन ग्‍लेशियर में भयंकर बर्फीले तूफान में बर्फ के नीचे दबे लांसनायक हनुमनतप्‍पा को छह दिन बाद जीवित निकाला गया था।

तुम जिन्‍दगी से जीते नहीं, पर लड़े तो थे, यह बात कम नहीं कि तुम जिद्द पर अड़े तो थे।

यह जिद्द ही है जो लांस नायक हनुमनथप्‍पा कोप्‍पड़ जैसे अनगिनत सैनिकों को अपने तन मन और प्राणों की परवाह से बेखबर देश की रक्षा के लिए हर मुश्किल से भिड़ जाने की ऊर्जा देती है। यह जिद्द ही तो है कि कर्नाटक में एक किसान परिवार में जन्‍में हनुमनथप्‍पा ने तीन बार असफल रहने के बाद भी सेना में भर्ती होने का संकल्‍प नहीं छोड़ा। यही जिद्द हनुमनथप्‍पा और उनके नौ साथियों को सियाचिन के बर्फीले मैदान डटे रहने की प्रेरणा देती रही और इसी जिद्द के सहारे हनुमनथप्‍पा ने बर्फ की कोख में छह दिन गुजार दिये।

कवि हरिओम पवार के शब्‍दों में – जो सैनिक सीमा रेखा पर ध्रुवतारा बन जाता है, उस कुर्बानी के दीपक से सूरज भी शर्माता है। उस सैनिक के शव का दर्शन तीरथ जैसा होता है।

मुख्‍यमंत्री ने शहीद लांसनायक के परिवार को 25 लाख रुपए का चैक दिया। उन्‍होंने इस परिवार को बेत्‍तादुर में खेती की भूमि और हुबली में एक प्‍लॉट तथा उनकी पत्‍नी को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की।

इस बीच, सेना ने कहा है कि मौसम में सुधार होने के बाद सियाचिन के नौ अन्‍य शहीदों के पार्थिव शरीर उनके परिजनों को सौंपने की व्‍यवस्‍था की जाएगी।

राष्‍ट्रपति, उपराष्‍ट्रपति और प्रधानमंत्री और अन्‍य नेताओं ने लांसनायक हनुमनतप्‍पा के निधन पर शोक व्‍यक्‍त किया है।

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