प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री के0 पी0 शर्मा ओली के बीच आज नई दिल्ली में प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत हुई। इस दौरान आपसी हित के मुद्दों पर विचार विमर्श के साथ साथ ऊर्जा और सम्पर्क सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। व्यापार और नेपाल की राजनीतिक स्थिति पर भी बातचीत हुई।
श्री ओली कल नई दिल्ली पहुंचे थे। आज सवेरे राष्ट्रपति भवन में उनका पारम्परिक स्वागत किया गया। पिछले वर्ष अक्टूबर में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद श्री ओली की यह पहली विदेश यात्रा है। उनके साथ 77 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल भी आया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और श्री ओली के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच सड़क, बुनियादी ढांचा, कला और संस्कृति तथा रेलवे क्षेत्र में नौ समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि नेपाल में शांति, स्थिरता और विकास दोनों देशों की प्राथमिकता है। श्री मोदी ने कहा कि एक दशक के संघर्ष के बाद नेपाल में नया संविधान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी संवैधानिक मुद्दों को बातचीत के जरिये सुलझाकर और सभी वर्गों की सहमति से नेपाल शांति और स्थिरता की नई उंचाईयों तक पहुंचने में सक्षम होगा।
भारत और नेपाल दो संप्रभुत्व देश है। इनकी मित्रता घनिष्ठ एवं अद्वितीय है। सीमाओं के खुले द्वार हमारी जनता के आपसी संबंधों को परिभाषित करते है। एक ध्वनि संस्कृति और परम्परा के हम साझे उत्तराधिकारी है। नेपाल में शांति, स्थिरता और उसका आर्थिक विकास हमारा साझा उद्देश्य है।
श्री मोदी ने कहा कि दोनों देश सात हजार मेगावाट की संयुक्त क्षमता वाली हाइड्रो परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। श्री मोदी ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा हो जाने से नेपाल की आर्थिक समृद्धि का रास्ता खुलेगा। श्री मोदी और श्री ओली ने भारत के मुजफ्फरपुर और नेपाल के ढालकेबार के बीच चार सौ किलोवाट की पारेषण प्रणाली का भी उद्घाटन किया।
नेपाल के प्रधानमंत्री के०पी शर्मा ओली ने कहा कि उनकी यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से आई गलतफहमियां दूर करना है। उन्होंने कहा कि भारत, नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है। उन्होंने कि भारत आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस यात्रा से भारत-नेपाल संबंध मजबूत होंगे।