भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन-इसरो ने एक और उपलब्धि हासिल करते हुए ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान-सी- 32 के जरिए देश का छठा दिशा निर्देशक उपग्रह आई आर एन एस एस-1 एफ सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया। यान ने उपग्रह को लेकर तीसरे पहर चार बजकर एक मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश भवन अंतरिक्ष केन्द्र से उड़ान भरी। उड़ान के बीस मिनट पन्द्रह सेकेंड के अन्दर ही यान ने उपग्रह को चार सौ नवासी किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित कर दिया। इसरो के अध्यक्ष ए एस किरण कुमार ने संगठन के वैज्ञनिकों को धन्यवाद देते हुए बताया कि वर्तमान श्रृंखला का अगला और अन्तिम प्रक्षेपण अगले महीने होगा।
छोड़ा गया उपग्रह सही स्थिति बताने में सहायक होगा। इस श्रंखला में अंतिम उपग्रह के प्रक्षेपण से भारत, अमरीका के जीपीएस, रूस के ग्लोनास और यूरोप के गेलीलियो के स्तर का एक पूरा तंत्र विकसित कर लेगा। जो भारत और उसके चारों ओर लगभग 1500 किलोमीटर के दायरे में काम करना शुरू करेगा। आज के सफल प्रक्षेपण से देश का अपना उपग्रह आधारित नेवीगेशन प्रणाली तैयार करने का लक्ष्य बस एक और उपग्रह के प्रक्षेपण से दूर रह गया है।
प्रधानमंत्री ने इस प्रक्षेपण के लिए इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी है। श्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि यह उपलब्धि हासिल करना देश के लिए गौरव की बात है।