दिल्ली की एक अदालत ने देशद्रोह के आरोप में दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक एस ए आर गिलानी को जमानत दे दी।
अपर सत्र न्यायाधीश दीपक गर्ग ने पचास हजार रूपए और इतनी ही राशि के एक निजी मुचलके पर जमानत दी है। दिल्ली पुलिस ने जमानत याचिका का विरोध किया और कहा कि यह घटना भारत माता की आत्मा पर हमला था और इससे अदालत की अवमानना हुई।
गिलानी के वकील सतीश टमटा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के अनुसार भारतीय दंड संहिता की धारा 124- क के तहत केवल नारे लगाना ही देशद्रोह के दायरे में नहीं आता।
इससे पहले, 19 फरवरी को मजिस्ट्रेट ने गिलानी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।