प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों से जल संरक्षण, विशेषकर वर्षा जल संचय का आग्रह किया है। आकाशवाणी से मन की बात कार्यक्रम में आज श्री मोदी ने कहा कि विभिन्न स्रोतों से पानी बचाने से किसानों को सिचांई में मदद मिलेगी। लोगों से जल संरक्षण के नए उपाय तलाशने का आग्रह करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि तालाबों को साफ रखा जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक पानी का संचय किया जा सके। श्री मोदी ने जल संरक्षण को एक आंदोलन बनाने का आह्वान किया।
आने वाली बारिश में बूंद-बूंद पानी कैसे बचाएं। गांव का पानी गांव में रहे, यह अभियान कैसे चलाएं। आप योजना बनाइये, सरकार की योजनाओं से जुडि़ए। ताकि एक ऐसा जन आंदोलन खड़ा करे जिसके पानी का महत्व भी समझे और पानी संचय के लिए हर कोई जुड़े।
आधे घंटे के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने किसानों से किसान सुविधा एप का उपयोग करने का अनुरोध किया, जिससे उन्हें कृषि और उपज बढ़ाने की नई तकनीकों की जानकारी मिल सकेगी। प्रधानमंत्री ने किसानों से खेती-बाड़ी में उवर्रक का कम इस्तेमाल करने का आग्रह भी किया।
अति फर्टिलाइजर के दुरूपयोग ने हमारी इस धरती मां को बीमार कर दिया है। कितना ही उत्तम फर्टिलाइजर क्यों न हो, लेकिन र हद से ज्यादा उपयोग करेंगे तो वह बर्बादी का कारण बन जाएगा। हर चीज बैलेंस होनी चाहिए। और इससे खर्चा भी कम होता है। पैसे आपके बचेंगे और हमारा तो मत है – कम लागत ज्यादा पावत इसी मंत्र को ले करके चलना चाहिए।
सात अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने देश से डायबिटिज यानि मधुमेह समाप्त करने का आह्वान किया। इसके लिए, उन्होंने योग और व्यायाम पर जोर दिया।
तपेदिक यानी टी.बी. के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए सरकार के उपायों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस रोग का लक्षण नजर आते ही जांच कराने में देर नहीं करनी चाहिए।श्री मोदी ने देश को डायबिटिज और टी.बी. से मुक्त कराने का आह्वान किया।
मैं आपसे आग्रह करूंगा कि चाहे टीबी हो या डायबिटीज हो हमें उसे परास्त करना है। भारत को हमें इन बीमारियों से मुक्ति दिलानी है। लेकिन ये सरकार, डॉक्टर, दवाई से नहीं होता है जब तक कि आप न करें।