संसद का सत्र आज से शुरू हो रहा है। इसके हंगामेदार होने की संभावना है। विपक्षी दल उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन का मुद्दा उठाने की तैयारी में हैं। उधर, सरकार ने लोकसभा में 13 और राज्यसभा में 11 विधेयक पारित कराने का लक्ष्य रखा है। इस सत्र में विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर चर्चा, रेलवे विनियोजन और वित्त विधेयक तथा वस्तु और सेवा कर तथा शत्रु संपत्ति संशोधन और मान्यीकरण सहित कई विधेयक कार्यसूची में शामिल हैं।
इस बीच, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने संसद के सुचारू संचालन के लिए कल सर्वदलीय बैठक की। विभिन्न दलों के नेताओं ने सत्र को सुचारू चलाने में सहयोग का आश्वासन दिया है।
सबसे इतना जरुर कहा है कि हां हम चर्चा चाहते हैं और इसलिए सबने सहयोग की बात भी कही है। हम सब अपेक्षा करते हैं कि आने वाला हमारा लोकसभा का सेशन ठीक तरीके से चले।
संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि 15 दिन के इस सत्र में लगभग 90 कार्य घंटे होंगे।
सरकारी काम के लिए 50 से 52 घंटे आवंटित किये जायेंगे और जिन विषयों पर चर्चा है उसमें मूल रूप से रेलवे का जो डिमांड फॉर ग्रांट्स है उसे टेक अप करना है। फाइनेंस बिल हैं।
लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उनकी पार्टी ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन पर चर्चा के लिए प्रश्नकाल स्थगित करने का नोटिस दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सूखे और पेयजल की समस्या पर भी चर्चा चाहती है।
अहम मुद्दा उत्तराखंड का है बहुत से अपोजिशन के मेम्बर सहमत हैं और वो भी इसके ऊपर चर्चा करने के लिए तैयार हैं। जो ड्रिंकिंग वाटर का प्रोबलम है वो भी एक बहुत बड़ा मुद्दा है। विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने की पूरी तैयारी की है। सत्र के दौरान कांग्रेस वाम दलों जदयू और अन्य विपक्षी पार्टियों के सहयोग से उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी कर चुकी है। कुछ विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सत्र के पहले दिन और देश के कुछ भागों में सूखे की स्थिति पर पहले सप्ताह में चर्चा कराने को लेकर नोटिस दिया है। भाजपा के सांसदों ने लोकसभा में इशरत जहां मुटभेड़ मामले में हाल के दिनों में सामने आये कुछ नए तथ्यों पर चर्चा के लिए नोटिस दिया है