सिंहस्थ महाकुंभ में प्रशासन द्वारा क्षिप्रा नदी के विभिन्न घाट पर 34 हजार शौचालय और 15 हजार स्नान घर बनवाए गए हैं। साथ ही स्वच्छता संकुल में दिव्यांगों के लिए भी पृथक से रेंप और टायलेट निर्मित किए गए हैं। इसका लाभ लेने वाले श्रद्धालुओं ने इसे अनुकरणीय पहल माना है।
श्रद्धालु और साधु-संत समाज की सुविधा के लिए 10,000 टायलेट का निर्माण मेला क्षेत्र में किया गया है। साथ ही वेस्टर्न टायलेट की सुविधा मेला क्षेत्र के सभी स्थान पर मुहैया करवाई गई है। वेस्टर्न टायलेट शीट का उपयोग साधु समाज के अलावा बहुतायत में श्रद्धालुओं द्वारा किया जा रहा है। इसी प्रकार 10 हजार मूत्रालय का निर्माण करवाया गया है। सिंहस्थ में सेटेलाइट टाउन बनाए गये हैं। यहाँ पर यात्रियों के लिए पीने का पानी, शौचालय और वाहन पार्किंग की सुविधा उपलब्ध करवायी गई है। खान डायवर्शन योजना में 19 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन पीने के पानी की सुविधा के लिए बिछाई गई है।
साधु समाज एवं श्रद्धालुओं को बिजली, पानी, सीवरेज आदि की अत्याधुनिक सुविधाएँ प्रशासन द्वारा उपलब्ध करवाई गई है। क्षिप्रा के दोनों किनारों पर नवनिर्मित घाट की रंगाई-पुताई के साथ एलईडी लाइट लगवाई गई है। साथ ही पौधारोपण और हरित पट्टी का विकास क्षिप्रा तट की खूबसूरती में चार चाँद लगा रहे हैं। इस बार क्षिप्रा तट पर लगभग 8 किलोमीटर घाट का निर्माण श्रद्धालुओं के स्नान के लिए करवाया गया है।
पंचकोशी मार्ग सिंहस्थ क्षेत्र तथा उज्जैन शहर में श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए सड़कों का निर्माण करवाया गया है। इन सड़कों के दोनों ओर पर्यावरण की दृष्टि से लगभग पौने दो लाख पौधों का रोपण ग्रीन सिंहस्थ के लिए करवाया गया है।
इसी प्रकार सुनहरी घाट, वाल्मीकी घाट एवं त्रिवेणी घाट पर भी पौधारोपण करवाया गया है। यहाँ पर बड़, पीपल, करंज, बाँस आदि प्रजाति के पौधे लगवाए गए हैं। क्षिप्रा के किनारे लाल पुल के समीप भूखी माता के सामने 600 मीटर क्षेत्र में औषधीय पौधों का रोपण पर्यावरण को स्वच्छ बनाने के लिए किया गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए उज्जैन शहर से गुजरने वाली प्रत्येक सड़क, फोर लेन, डिवाइडर, सेंट्रल लाइट आदि क्षेत्र में पौधरोपण करवाया गया है। रात में इन मार्गों से गुजरना यात्रियों को सुखद अनुभूति दे रहा है।
मंगलनाथ झोन में सड़कों की साफ-सफाई रोजाना करवाई जा रही है। जगह-जगह कचरा पेटी रखी गई है। क्षिप्रा नदी के घाट पर गंदगी नहीं फैलाने की सलाह स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को वहाँ तैनात शासकीय अमले द्वारा दी जा रही है। गायत्री शक्तिपीठ उज्जैन एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के माध्यम से मंगलनाथ, गढ़कालिका तथा कालभैरव क्षेत्र में श्रद्धालुओं को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा दी जा रही है।