मेला तो आखिर मेला है, चाहे वह धार्मिक ही क्यों न हो, फिर तो यह बारह साल में एक बार होने वाला महाकुंभ सिंहस्थ है। कुंभ में लोगो की भारी भीड़ का आना लाज़मी है। समूचे देश से आये श्रद्धालु व्यवस्थाओं की सराहना कर प्रशासकों को धन्यवाद दे रहे हैं।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ और उनकी क्षिप्रा में आस्था की डुबकी तथा धर्म और आध्यात्म का संगम प्रतिदिन यहाँ दिखाई दे रहा है। संतो-महन्तों साधुओं सहित श्रद्धालुओं का स्नान के लिए आना और जयकारों के साथ स्नान का नजारा देखने वालों को अभिभूत एवं सम्मोहित कर देता है। व्यवस्थाएँ चाक-चौबंद हैं। घाटों की रौनक देखने लाय
क है। साफ, स्वच्छ बहती क्षिप्रा में उड़ते फव्वारों के साथ आस्था और आध्यात्म का सामूहिक स्नान अपने आप में एक अनोखी ऊर्जा समेटे हुए है। यही वजह है कि समूचे हिन्दुस्तान ही नही विदेशों से आए श्रद्धालु भी इसमें शिरकत कर रहें है।
होमगार्ड की मोटर बोट की निरंतर गश्त, आवागमन मार्ग एवं घाटों पर पुलिस एवं पैरामिलेट्री फोर्स के जवान अपनी डयूटी पर मुस्तैद है। क्षिप्रा के घाटों की साफ-सफाई निरंतर की जा रही है। सफाईकर्मी हर आवश्यक स्थान पर तैनात किये गए हैं। कचरा एकत्रित करने के लिए जगह-जगह डस्टबिन रखवाये गए हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए फायर वाहन, मेडिकल एम्बुलेंस और तैराक-दल तैनात हैं।