प्रदेश में करीब दो हजार कर्मचारी अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। इन कर्मचारियों को पहली बार पदोन्नति मिलना थी। विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक भी हो चुकी थी, लेकिन आदेश जारी होने से ठीक पहले पदोन्नति में आरक्षण पर जबलपुर हाईकोर्ट का फैसला आ गया। अकेले मंत्रालय में ऐसे 85 कर्मचारी हैं, जिसमें से महज 25 को ही पदोन्नति मिली है।
वर्ष 1999 और उससे पहले नौकरी में आए कर्मचारी पदोन्नति को लेकर ज्यादा परेशान हैं। दरअसल, इन कर्मचारियों को पहली बार पदोन्नति मिल रही थी। उनके घर और परिवार में भी खुशी का माहौल था। क्योंकि पद बढ़ने के साथ तनख्वाह भी बढ़ती।
डीपीसी की बैठक के बाद कर्मचारियों को आदेश जारी होने का इंतजार था। मंत्रालय में 25 कर्मचारियों के पदोन्नति आदेश जारी हो भी गए थे, तभी हाईकोर्ट का फैसला आ गया और पदोन्नति पर रोक लग गई। अब ये कर्मचारी पिछले 8 माह से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं।
राज्य सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति में आरक्षण मामले की सुनवाई 24 जनवरी से शुरू होगी। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि 24 जनवरी से इस मामले को रोज सुना जाएगा। कर्मचारी 31 जनवरी तक फैसला आने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।