शत-प्रतिशत घरों में शौचालय बनाने एवं खुले में शौच की प्रवृति को समाप्त करने के लिए कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल और सख्त हो गए हैं। शौचालय विहीन परिवारों को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रखने की घोषणा के बाद अब कलेक्टर ने शौचालय विहीन परिवारों की फरियाद भी जनसुनवाई में सुनना बंद कर दिया है।
मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचे उन लोगों की ही शिकायत कलेक्टर ने सुनीं, जिन्होंने अपने आवेदन पर लिख दिया कि उनके घर में शौचालय है। जिनके घरों में शौचालय नहीं थे, उन सभी लोगों को उस हॉल में भी नहीं जाने दिया जहां कलेक्टर जनसुनवाई कर रहे थे।
जनसुनवाई में पहुंचे गोविंद पुत्र जयराम नागर निवासी हलगांवड़ा बुजुर्ग ने बताया कि वह अपनी शिकायत लेकर जनसुनवाई में आया है। कर्मचारी उसे कलेक्टर से मिलने नहीं दे रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कलेक्टर उसी से मिलेंगे, जिनके घर में शौचालय बना होगा। अब घर जाकर सबसे पहले सचिव के पास पहुंचकर शौचालय बनाने के लिए अंशदान राशि 1360 रुपए जमा कराऊंगा। लालदेह निवासी रेखा भिलाला को भी कर्मचारी कलेक्टर से इसलिए मिलने नहीं दे रहे थे कि उसके आवेदन पर शौचालय है नहीं लिखा गया था।
बाद में उसकी समस्या को गंभीर मानकर कलेक्टर ने मिलने की स्वीकृति दी। रेखा का आरोप था कि उसके गांव में ऐसी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति कर दी जो गांव की निवासी नहीं है और उसने फर्जी अंकसूची भी लगाई है। गोविंद एवं रेखा की तरह ही बहुत से लोग थे जो जनसुनवाई में आवेदन लेकर तो पहुंचे थे, लेकिन शौचालय नहीं होने के कारण बिना सुनवाई कराए ही उन्हें बैरंग लौटना पड़ा। आवेदक झूठ बोलकर जनसुनवाई में न चले जाए इसलिए कलेक्टर ने एनआईसी प्रभारी को संबंधित आवेदक का नाम सर्च कर शौचालय है या नहीं पहले आवेदन पर अंकित करने के लिए ड्यूटी लगाई थी।
जनसुनवाई में ग्राम ढोढपुर से 70 वर्षीय वृद्घ माधो पुत्र कल्ला बैरवा भी पहुंचा था। माधो ने कलेक्टर से रोते हुए कहा कि साहब! तीन बेटे हैं, लेकिन कोई सा मुझे रोटी नहीं देता है। मैं भूखा रहता हूं। इस बूढ़ापे में मुझसे चला तक नहीं जाता। मैं रोटी के लिए मजदूरी करने कहा जाऊंगा। वृद्घ की बात सुनकर कलेक्टर भी भावुक हो गए और बुजुर्ग से पूछा कि तीनों बेटों को जेल भेज दें क्या? तब वह सुधरेंगे।
इस पर बुजुर्ग माधो बोला कि एक नाती है जो खाना खिला देता है। बेटे उसे मारते हैं। इस पर कलेक्टर ने कहा नाती अच्छा है। उसको कुछ नहीं होगा। शिकायत सुनाते-सुनाते बुजुर्ग का बीपी बढ़ गया और वह झटके लेने लगा। कलेक्टर ने तत्काल डॉक्टर बुलाकर उसका उपचार कराया। इसके बाद कलेक्टर ने बुजुर्ग के आवेदन को कार्रवाई के लिए एसडीएम आरबी सिंडोस्कर को दे दिया।
जनसुनवाई में बिजली एवं पानी की समस्या सबसे अधिक आईं। व्यक्तिगत रूप से पहुंचे कई लोगों ने बिजली कंपनी द्वारा मनमाने बिल देने एवं कनेक्शन काट देने की शिकायत की। कई गांवों से आए लोगों ने सामूहिक रूप से बिजली नहीं होने एवं पानी की समस्या की शिकायत की। ग्राम ककरदा से आई महिला स्व सहायता समूह की आधा सैंकड़ा के करीब महिलाओं ने बिजली के मामले को लेकर कलेक्टोरेट गेट के आगे धरना भी दिया।
सलमान्या से आई 80 से ज्यादा आदिवासियों ने बिजली पानी की समस्या बताई। महिलाओं ने बताया कि हमें पीने का पानी 2 किमी दूर निजी बोर से भरकर लाना पड़ता है। बोर बंद हो जाने पर 3 किमी दूर कुएं से पानी भरकर लाना पड़ता है। इसी तरह अन्य गांवों से भी लोग बिजली पानी की समस्या लेकर पहुंचे।
श्रीहजारेश्वर मिडिल स्कूल में एमडीएम नहीं मिलने की शिकायत स्कूल के छात्र-छात्राओं ने जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर से की। विद्यार्थियों ने बताया कि हमें स्कूल में नियमित रूप से भोजन नहीं मिलता है। भोजन इतना कम पकाया जा रहा है कि सभी बच्चों को पूरा नहीं होता है। इस संबंध में हमारे अभिभावक कई बार स्कूल प्रबंधन से शिकायत कर चुकें है।
हेडमास्टर का कहना है कि हमने कम भोजन मिलने की शिकायत हमारे वरिष्ठ अधिकारियों को कर दी है। विद्यार्थियों के साथ पहुंची उनकी माताओं ने कहा कि स्कूल में गरीब बैरवा जाति के बच्चे पढ़ते हैं, जिन्हें एमडीएम की आवश्यकता है। स्कूल स्टाफ व समूह संचालक की भी मिली-भगत है। इसलिए तो समूह पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। कलेक्टर ने जांच कराकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।