कहते हैं कि जोड़ियां आसमान में बनती हैं, लेकिन प्रेमी-प्रेमिका अपना प्यार पाने के लिए क्या-क्या जतन नहीं करते। गंडे-ताबीज, टोने-टोटके से लेकर धर्मस्थलों पर मन्नत मांगना इनमें शामिल है। इस बात का गवाह है राजधानी से करीब 25 किमी दूर प्राचीन पार्वती माता का गुफा मंदिर। यहां अपनी मोहब्बत को हासिल करने के लिए प्रेमी मन्नत मांगते हुए बरगद के पेड़ को धागा और चुनरी बांधते हैं।
मुराद पूरी होने पर जोड़े से आकर उसे खोलते हैं। शहर के पास तीर्थ भोजपुर स्थित शिव मंदिर से करीब जंगल में माता पार्वती का अति प्राचीन मंदिर है। इसमें प्राकृतिक गुफा में माता पार्वती विराजमान हैं। मंदिर परिसर में एक वट वृक्ष लगा है। इसकी शाखाओं में सैकड़ों की संख्या में लाल धागे (कलावा) और चुनरी बंधी हैं। मंदिर के पुजारी कीरतनगर निवासी रतनलाल ने बताया कि यहां माता ब्रह्मचारिणी विराजमान हैं। उन्होंने वर के रूप में भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या की थी।
ज्योतिषाचार्य पं.विनोद गौतम बताते हैं, कि पार्वती गुफा में काफी पहले से युवा मन्नत मांगने जाते रहे हैं। दरअसल प्रेम का ग्रह शुक्र होता है। उसे पर्यावरण प्रिय होता है। पार्वती गुफा वाला क्षेत्र भी काफी रमणीक है। पं.गौतम का कहना है कि तथाकथित लोग वशीकरण के नाम पर गंडे-ताबीज आदि देकर अपना उल्लू सीधा करते हैं। प्रेम एक अनुभूति होती है, जो स्वयं उत्पन्न होती है।