सुप्रीम कोर्ट ने लड़कियों की घटती संख्या को मानव जाति के लिए घातक संकेत बताते हुए चिंता जताई है। कोर्ट ने इंटरनेट कंपनियों गूगल, याहू और माइक्रोसॉफ्ट को प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण से संबंधित जानकारी साइटों से हटाने के लिए विशेषज्ञों की आंतरिक समिति बनाने का आदेश दिया।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति आर. भानुमति की पीठ ने गुरुवार को कहा कि किसी भी प्रकार की शंका होने पर इंटरनेट कंपनियों की समितियां नोडल एजेंसी के संपर्क कर सकती हैं। केंद्र सरकार ने दिशानिर्देश और आवश्यक कार्रवाई के लिए नोडल एजेंसी की नियुक्ति की है। हालांकि कोर्ट ने तीनों इंटरनेट कंपनियों की भारतीय इकाई को आश्वस्त किया कि उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू नहीं की जाएगी।
कोर्ट का विचार उन्हें स्थानीय कानूनों और चिंताओं के प्रति उत्तरदायी बनाना है। कोर्ट ने कहा कि हम अपने 19 सितंबर 2016 के आदेश को दोहराते हैं। तीनों कंपनियों की विशेषज्ञ समितियां इंटरनेट पर पीसीपीएनडीटी कानून, 1994 विरोधी बातें दिखाए जाने पर कदम उठाएंगी और उन्हें साइट से हटाएंगी।
इसके अलावा समिति कानून का उल्लंघन करने वाली चीजें को अपने विवेक से हटा सकेंगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इंटरनेट कंपनियों की खिंचाई करते करते हुए कहा कि वे पैसा बनाना जानती हैं लेकिन भारतीय कानून का आदर करना नहीं। कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट सर्च इंजनों को ऐसी सभी सामग्रियों को रोकना होगा जो भ्रूण के लिंग निर्धारण में मदद और कानून का उल्लंघन करती हैं।