पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में भारत द्वारा किया गया परमाणु परीक्षण एक ऐसा पल था, जिसके बाद से पूरी दुनिया हमारे देश को ताकतवर राष्ट्रों में गिनने लगी थी।
यूं तो पोखरण में हुए उस परमाणु विस्फोट के पीछे गर्व और लगन से भरी कई कहानियां हैं, मगर एक कहानी ऐसी
भी है जो ज्यादा सुनी नहीं गई।
ये कहानी है भारत की चतुराई, सूझबूझ और तुरंत निर्णय लेकर पाकिस्तान को भौचक कर देने की। दरअसल, अटलजी को जब यह पता चला था कि पाकिस्तान आने वाले दो से तीन सप्ताह में परमाणु बम का परीक्षण कर सकता है तो उन्होंने तुरंत रणनीति बदलते हुए भारत की ओर से पहले विस्फोट कर डाला।
इस त्वरित निर्णय का नतीजा ये हुआ कि पाकिस्तान बैकफुट पर आ गया और दुनियाभर में भारत की वैज्ञानिक मेधा और ताकत का डंका बज गया।
किस्सा मई 1998 का है। तब भारत में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार थी तो पाकिस्तान में नवाज शरीफ प्रधानमंत्री थे। भारत मई 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में अपना पहला परमाणु परीक्षण कर चुका था और दूसरे की तैयारी थी।
जब तैयारियां चल रही थीं, तब देश में नरसिम्हा राव सरकार सत्ता में थी। श्री राव को तत्कालीन भारतीय वैज्ञानिकों ने परमाणु परीक्षण कर सकने की तैयारी संबंधी जानकारी दे दी थी।
मगर श्री राव चार-पांच माह बाद देश के आम चुनाव देखते हुए थोड़ा पीछे हट गए। दरअसल, उनका सोचना था कि चुनाव जीतकर आएंगे और तब विस्फोट करेंगे।
मगर चुनाव में दांव उल्टा पड़ा और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार बन
गई। तब श्री राव ने अटलजी को कहा था- ‘जो मैं न कर सका, अब उसे आप पूरा करिएगा”।
सत्ता में आने के बाद से भारत की सुरक्षा तैयारियों को लेकर अटलजी काफी सजग थे। उन्होंने राजस्थान के पोखरण में परमाणु परीक्षण की गुपचुप तैयारियों के निर्देश दे दिए थे। इसी बीच उन्हें पता चला कि पाकिस्तान भी जल्द ही परमाणु परीक्षण कर सकता है।
अटलजी ने यह गोपनीय सूचना मिलते ही तुरंत परीक्षण करने का निर्णय लिया। चूंकि भारतीय वैज्ञानिकों, सेना व परीक्षण से जुड़ी तमाम कड़ियों की तैयारी तो थी ही, इसलिए 11 मई 1998 को ‘ऑपरेशन शक्ति” के तहत तीन परमाणु बमों का परीक्षण किया गया।
इससे दुनिया चौंकी ही थी कि दो दिन बाद 13 मई को फिर दो बम फोड़े गए। इससे पाकिस्तान घबरा गया और उसने भी महज 15 दिन बाद परमाणु विस्फोट कर दिया। मगर तब तक देर हो चुकी थी। दुनिया में भारत की ताकत का डंका बज चुका था और पाकिस्तान पिछड़ चुका था।