स्वामी विवेकानंद के ज्ञान के बारे में तो पूरी दुनिया जानती है, किंतु उनके संघर्ष के दिनों के बारे में बहुत कम सूचनाएं सार्वजनिक हैं। इनमें से एक जानकारी यह भी है कि उन्हें अपने परिवार के अन्य सदस्यों पालन-पोषण के लिए कई-कई दिन तक भूखा रहना पड़ता था।
किस्सा उस दौर का है जब स्वामीजी शास्त्रों का अध्ययन कर ज्ञान अर्जित कर रहे थे। इसी बीच अचानक एक दिन उनके पिता का देहांत हो गया। इससे परिवार पर अचानक आर्थिक संकट आ खड़ा हुआ। पिता की मृत्यु के बाद स्वामीजी के परिवार ने बहुत गरीबी में जीवन बिताया। एक दिन के भोजन के लिए भी उनकी मां और बहन को बहुत संघर्ष करना पड़ता था।
कई बार तो स्वामीजी चुपचाप पानी पीकर कई दिन गुजार देते थे, ताकि परिवार के अन्य सदस्यों को पर्याप्त भोजन मिल सके। किंतु असहनीय भूख और उससे उपजी वेदना भी उन्हें अपनी साधना के पथ से विचलित नहीं कर सकी।
उन्हीं दिनों अर्जित किए गए ज्ञान ने उन्हें अमेरिका के शिकागो में हुई धर्मसंसद में ‘विश्वबंधुत्व का संदेश देने वालामहान योगी’ बनाया। उन्होंने कभी अपने संघर्ष को नकारात्मक नहीं बताया बल्कि उसे जीवन का सच्चा पाठ ही कहा।