मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना में सरकार राष्ट्रीय स्तर के कॉलेजों के साथ-साथ मप्र के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों की फीस भी भरेगी। यह फीस अनुदान के रूप में होगी।
योजना के संबंध में हुई परियोजना परीक्षण समिति की हुई बैठक में बताया गया कि योजना के जरिए हर साल करीब साढ़े 11 हजार विद्यार्थियों को इसका फायदा मिलेगा। तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सरकारी कॉलेजों में एडमिशन लेने वाले छात्रों के लिए भी 12वीं में न्यूनतम 85 प्रतिशत अंक जरूरी है। उन्हें ही योजना के तहत फीस का अनुदान दिया जाएगा।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने योजना के लिए 1 हजार करोड़ स्र्पए का कोष बनाने की घोषणा की है। 85 प्रतिशत से कम अंक लाने वालों को यह फीस ब्याज मुक्त ऋ ण के रूप में दी जाएगी। इस साल नए शिक्षण सत्र से यह योजना लागू होनी है। 85 प्रतिशत अंक होने के बाद भी यदि सरकार द्वारा चयनित कॉलेजों में एडमिशन नहीं मिलता है, तो सरकार एक लाख रुपए सालाना सहयोग राशि देगी।
योजना के तहत विद्यार्थियों को सरकार की तरफ से मिलने वाला फीस का पैसा सीधे कॉलेज के खातों में पहुंचेगा। सभी कॉलेजों को सरकार की तरफ से चिठ्ठी भेजी जाएगी, जिसमें 85 प्रतिशत अंक वाले विद्यार्थियों से फीस नहीं लेने का कहा जाएगा।
राज्य सरकार की यह योजना सिर्फ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं परीक्षा पास करने वाले विद्यार्थियों के लिए है। मप्र में सीबीएसई से पढ़ने वाले विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। सीबीएसई की परीक्षा में 85 प्रतिशत अंक वाले विद्यार्थियों की संख्या बहुत ज्यादा होने की वजह से उन्हें योजना से बाहर रखा गया है।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान में कॉलेज के साथ-साथ हॉस्टल और मेस की फीस भी शामिल होगी।
अधिकारियों के मुताबिक योजना में कुछ प्राइवेट कॉलेज भी शामिल होंगे, लेकिन उनका चयन सभी विभागों के प्रमुखों की साधिकार समिति करेगी।
आईआईटी, आईआईएम, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, एम्स, स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च, सरकारी मेडिकल संस्थान, निजी मेडिकल संस्थान, मप्र के सरकारी और अनुदान प्राप्त इंजीनियरिंग कॉलेज, अन्य प्राइवेट संस्थान।
निजी कॉलेजों के नाम अभी तय नहीं हुए हैं। इसके लिए एक और बैठक की जाएगी। कॉलेज फीस के साथ हॉस्टल की फीस भी अनुदान में शामिल होगी।