प्रदेश के हर जिले में जनता के विरोध को देखते हुए सरकारी शराब दुकानों की सुरक्षा के लिए नगरसैनिक और सिक्यूरिटी गार्ड तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा विरोध से घबराई सरकार ने दुकानों का बीमा कराने का भी फैसला लिया है। शराब के स्टॉक, पैसों की सुरक्षा और कर्मचारियों का गारंटी बीमा कराया जाएगा। शराब दुकानों का संचालन करने के लिए गठित छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसी) ने बीमा कंपनियों से निविदा बुलाया है।
कॉर्पोरेशन ने बीमा का प्रारूप और शर्त तैयार कर मंगलवार को निविदा की प्रक्रिया शुरू कर दी। सरकारी शराब दुकानों का बीमा एक अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2018 की आधी रात तक रहेगा। चार प्रकार की बीमा पॉलिसी ली जाएगी। पहली फायर पॉलिसी होगी, जिसमें 50 करोड़ तक के स्टॉक में आग, आपदा, भूंकप, आतंक के कारण स्टॉक को नुकसान होता है तो उसका बीमा रहेगा। दूसरी पॉलिसी चोरी या सेंधमारी की घटना होने पर नुकसान की भरपाई करेगी। इसमें भी 50 करोड़ तक के स्टॉक का बीमा रहेगा। तीसरी पॉलिसी मनी इंश्योरेंस की रहेगी।
दुकान में रखी नकद राशि चोर, लुटेरे या डकैत ले जाते हैं तो उसका बीमा रहेगा। नकद राशि पर सरकार नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्र की शराब दुकानों का 10 लाख, नगर पंचायत क्षेत्र की दुकानों का पांच लाख और ग्राम पंचायत क्षेत्र की दुकानों का दो लाख का बीमा कराने जा रही है। चौथी पॉलिसी शराब दुकान के सुपरवाइजर, सेल्समैन, अन्य कर्मचारी और गार्ड के बीमा की होगी। कर्मचारियों की संख्या लगभग पांच हजार होगी। कर्मचारियों का कुल 11 करोड़ का बीमा होगा।
निविदा प्रारूप में कॉर्पोरेशन ने इस बात का अनुमान लगाया है कि प्रदेश की 712 देसी-विदेशी शराब दुकानों में हमेशा औसतन 100 करोड़ का स्टॉक और नकद रहेगा। नकद राशि को खतरा इसलिए रहेगा कि सुबह 11 से रात नौ बजे तक बिक्री की राशि रात में दुकान में ही पड़ी रहेगी। उस राशि को अगले दिन सुबह 11 बजे बैंक में जमा कराया जाएगा।
आबकारी अधिकारियों का कहना है कि नक्सल क्षेत्र की सरकारी शराब दुकानों को ज्यादा खतरा रहेगा। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 27 शराब दुकानें संचालित होंगी। इनमें गरियाबंद जिले की छह, राजनांदगांव जिले की चार, कोण्डागांव जिले की पांच, दंतेवाड़ा जिले की तीन, सुकमा जिले की चार और बीजापुर जिले की पांच सरकारी शराब दुकानें शामिल होंगी।
विधानसभा में सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश के उल्लंघन का मुद्दा उठेगा
सुप्रीम कोर्ट ने अशोक लेंका विरुद्ध ऋषि दीक्षित मामले की सुनवाई करते हुए राज्य शासन के निर्णय के खिलाफ तल्ख टिप्पणी कर आदेश दिया था। वर्ष 2005 में लाइसेंसी दुकानदारों ने लाइसेंस शुल्क नहीं पटाया और प्रदेश से भाग गए थे। इस मामले में हाईकोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए इन दुकानों का संचालन सरकार खुद ही करने लगी थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि ऐसा लगता है राज्य सरकार को अपने संविधान की कार्यप्रणाली सही ढंग से ज्ञात नहीं है।
संविधान प्रदत्त व्यवस्था को सरकार ने राजस्व बढ़ाने की प्रक्रिया समझ ली है। हम उम्मीद करते हैं कि सरकार व मशीनरी अगली बार से ऐसी गलती नहीं करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में संविधान के अनुच्छेद 47 का अक्षरशः पालन करने व इसी के अनुरूप शराब नीति का संचालन करने का आदेश दिया था। विधानसभा में कांग्रेस इसी आदेश को पटल पर रखकर सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश का पालन नहीं करने का आरोप लगाएगी। सामाजिक कार्यकर्ता ममता शर्मा ने भी इसी मुद्दे पर विधानसभा की याचिका समिति को आवेदन दिया है।
कांग्रेस विधायक दल के नेता टीएस सिंहदेव ने बताया कि विधानसभा में गुरुवार को शराबबंदी के अलावा सुकमा नक्सली हमले को उठाकर सरकार को घेरा जाएगा। इस मुद्दे पर विपक्ष सरकार पर खुफियातंत्र और नक्सल विरोधी अभियान में फेल होने का आरोप लगाएगा। सरकार से कहा जाएगा कि इस बार भी चूक की बात कहकर शहीद जवानों का अपमान न करें।