उपहार सिनेमा कांड के आरोपी गोपाल अंसल को सुप्रीम कोर्ट ने सरेंडर के लिए और मोहलत देने से इन्कार कर दिया है। इसके बाद उन्हें तुरंत सरेंडर करते हुए सजा के लिए जेल जाना होगा। गोपाल अंसल को राहत दिलाने के उद्देश्य से वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी कोर्ट में उपस्थित हुए। लेकिन कोर्ट ने जेठमलानी की दलीलों को दरकिनार करते हुए गोपाल अंसल को सरेंडर करने के लिए और वक्त देने से मना कर दिया।
इससे पहले कोर्ट की ओर से गोपाल अंसल को राहत देते हुए 9 मार्च को उन्हें जेल नहीं भेजने की याचिका को खारिज करते हुए आत्मसमर्पण करने को लेकर 10 दिन की मोहलत दी गयी थी। जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस ए के गोयल की खंडपीठ ने अंसल को सजा की 7 महीने की बाकी अवधि को पूरा करने के लिए 20 मार्च को आत्मसमर्पण का निर्देश दिया था। गोपाल अंसल अपने भाई सुशील अंसल के समान जेल की बाकी सजा में छूट की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर उनकी ओर से अपने स्वास्थ्य को एक बड़ी वजह बताया गया था। लेकिन गोपाल अंसल की दलीलों का कोर्ट पर कोई असर नहीं हुआ।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए गोपाल अंसल को जेल की बाकी सजा काटने का निर्देश दिया था, जबकि उनके बड़े भाई सुशील अंसल को जेल की सजा से राहत दी गयी थी। कोर्ट ने उनकी उम्र संबंधी दिक्कतों को ध्यान में रखते हुये कहा था कि उन्होंने पहले ही जेल की सजा काट ली। साथ ही कोर्ट ने अंसल बंधुओं पर निचली अदालत की ओर से लगाये गये 30-30 करोड़ के जुर्माने को बरकरार रखा था।
गोपाल अंसल की ओर से भी इसी तरह की राहत का अनुरोध करते हुये दावा किया है कि उसकी आयु 69 वर्ष की है और अगर उसे जेल भेजा गया तो उसके स्वास्थ्य को नुकसान होगा। बता दें कि वर्ष 1997 में उपहार सिनेमा अग्निकांड उस वक्त हुआ जब उपहार सिनेमा में हिन्दी फिल्म ‘बॉर्डर’ चल रही थी। इस अग्निकांड में 59 दर्शकों की मृत्यु हो गई थी। जिसमें करीब दो दर्जन बच्चे शामिल थे। मामले में रियल स्टेट कारोबारी और उपहार सिनेमा के मालिक अंसल बंधुओं को लापरवाही बरतने का दोषी करार दिया गया।