आज शहीद दिवस है। 1931 में आज ही के दिन भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरू को फांसी दी गई थी। इन तीनों वीर सपूतों से जुड़ी कई कहानियां प्रचलित हैं। एक किस्सा यह भी है कि भगत सिंह के गिरफ्तार होने के बाद सुखदेव फूट-फूट कर रोए थे।
यह किस्सा तब का है जब इन क्रांतिकारियों ने रेवोलूशनरी पार्टी का गठन कर दिया था। भगत सिंह कामयाबीपूर्वक सांडर्स हत्याकांड को अंजाम दे चुके थे। अंग्रेज अब भी उन्हें तलाश रहे थे।
रेवोलूशनरी पार्टी की एक बैठक में तय हुआ कि अंग्रेजों को भारत से भगाने के अगले क्रम में अब सेंट्रल एसेंबली में बम धमाका किया जाएगा।
उस बैठक में सुखदेव मौजूद नहीं थे। फैसला हुआ कि इस काम के लिए भगत सिंह को नहीं भेजा जाएगा क्योंकि पुलिस पहले ही सांडर्स हत्याकांड में उनकी तलाश कर रही है। पार्टी नहीं चाहती थी कि भगत पुलिस के हाथ लग जाएं। लेकिन बाद में सुखदेव ने यह फैसला पलट दिया। उन्होंने कहा, इस काम के लिए भी उनके दोस्त भगत सिंह ही जाएंगे।
भगत सिंह को भेजा गया और वे पकड़े गए। इतिहासकार बताते हैं कि भगत सिंह के गिरफ्तार होने के बाद सुखदेव बंद कमरे में बहुत रोए थे। उन्हें अफसोस था कि उन्होंने अपने सबसे प्यारे दोस्त को कुर्बान कर दिया।