पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की विराट सफलता के पीछे निश्चित रूप से उनकी कड़ी मेहनत और लगन ही थी, लेकिन एक छोटा-सा काम और था जिसने कलाम को इतना महान बनाया। यह
काम था रोज सुबह कागजों को अलग-अलग हिस्सों में छांटकर उन पर काम करना।
यह खुलासा खुद डॉ. कलाम ने स्कूली बच्चों के एक सवाल के बदले किया था। वे सुबह 5 बजे उठते और रोजाना एक घंटा खुली हवा में जरूर टहलते। इस दौरान दिन में कम से कम तीन महत्वपूर्ण काम पूरे करने की योजना
बनाते। फिर लौटकर स्नान आदि से निवृत्त होकर ऑफिस पहुंचते। वहां सबसे पहले खुद अपनी टेबल, डेस्क आदि की सफाई करते।
इसे वे स्वावलंबन का पहला सबक कहते थे। इसके ठीक बाद वे सारे कागज लेकर बैठते और पांच मिनट उन्हें देते। इन कागजों को वे तीन श्रेणियों में बांटते- सबसे जरूरी, कम जरूरी और दीर्घावधि। सबसे जरूरी काम वाले
कागजों को अपनी आंखों के सामने डेस्क रखते और उनसे जुड़ा काम किसी भी सूरत में उस दिन पूरा कर लेते।
कम जरूरी को अपने अधीनस्थों को देते और दीर्घावधि पर खुद लंबे समय की योजना बनाते। डॉ. कलाम के मुताबिक यही एक काम उनकी सफलता का सबसे छोटा किंतु गहरा राज था।