न्यायिक सेवा में पुरुषों के वर्चस्व को तोड़ते हुए महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

न्यायिक सेवा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती जा रही है। अधिकतर उच्च पदों पर पुरुषों के वर्चस्व को तोड़ते हुए महिलाओं ने अपना परचम लहराया है। देश में पहली बार चारों बड़े हाई कोर्ट्स बॉम्बे, मद्रास, कलकत्ता और दिल्ली हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस महिलाएं बनी हैं।
गौरतलब है कि देश में कुल 24 हाई कोर्ट हैं। इनमें 632 जज काम कर रहे हैं, जिनमें से महिला जजों की संख्या 68 है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ एक महिला जज जस्टिस आर. भानुमति हैं, जबकि यहां कुल 28 जज काम कर रहे हैं।
इन चारों हाई कोर्ट की स्थापना ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी। हाल ही में इंदिरा बनर्जी को मद्रास हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस बनाया गया है। इसके साथ ही महिलाओं ने यह इतिहास रच दिया है। मुख्य न्यायाधीश को मिलाकर मद्रास हाई कोर्ट में कुल 6 महिला जज हैं, जबकि पुरुष जजों की संख्या 53 है।
उधर, बॉम्बे हाई में देश के सभी उच्च न्यायालयों से ज्यादा महिलाएं है। यहां 61 पुरुष जज और 11 महिलाएं जज हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट में मंजुला चेल्लूर मुख्य न्यायाधीश हैं और उनके बाद एक महिला जस्टिस वीएम ताहिलरामनी का नाम है। जी. रोहिणी को अप्रैल 2014 में दिल्ली हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है।
दिल्ली हाई कोर्ट में 9 महिला जज हैं, जबकि पुरुष जजों की संख्या 35 है। यहां भी दूसरे नंबर पर महिला जज हैं, जिनका नाम जस्टिस गीता मित्तल है। कलकत्ता हाई कोर्ट की कार्यकारी चीफ जस्टिस निशिता निर्मल 1 दिंसबर 2016 से इस पद को संभाल रही हैं। यहां 4 महिला जज हैं, जबकि पुरुष जजों की संख्या 35 है।

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