एक मई से लाल बत्ती के वीआईपी कल्चर को खत्म करने के फैसले के बाद जहां ज्यादातर नेता इसका समर्थन कर रहे हैं वहीं कई ने विरोध भी किया है। केंद्र के इस फैसले का समर्थन करते हुए भाजपा के कई नेता और मुख्यमंत्रियों ने अपने वाहन से लाल बत्ती हटा दी है। इनमें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस भी शामिल हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह तो काफी समय पहले ही यह कदम उठा चुके हैं।
भाजपा शासित राज्य राजस्थान में भी सीएम वंसुधरा राजे इस मामले में सख्त नजर आईं और खबर हैं कि उन्होंने भी अपने मंत्रियों को अपने वाहनों से लाल बत्ती हटाने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तो खुद ही अपनी कार से लाल बत्ती हटाई।
इस बीच सीपीएम नेता वृंदा करात ने इस कदम को लेकर पीएम पर निशाना साधा और कहा कि गाड़ियों से बत्तियां तो मिनटों में हट जाती हैं असल दिक्कत तो दिमाग से लालबत्ती हटाने में आती है। लाल बत्ती हटाने से ज्यादा बड़ा मुद्दा लाल बत्ती कल्चर खत्म करन है। बता दें कि देश में बढ़ते वीआईपी कल्चर पर अंकुश लगाते हुए मोदी सरकार ने सभी नेताओं, जजों तथा सरकारी अफसरों की गाड़ियों से लाल बत्ती हटाने का निर्णय लिया है।
इनमें राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, राज्यों के मुख्यमंत्री व मंत्री तथा सभी सरकारी अफसरों के वाहन शामिल हैं।
अब केवल एंबुलेंस, फायर सर्विस जैसी आपात सेवाओं तथा पुलिस व सेना के अधिकारियों के वाहनों पर नीली बत्ती लगेगी। यह फैसला एक मई से लागू होगा।
बुधवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, “इस ऐतिहासिक निर्णय में कैबिनेट ने आपात सेवाओं को छोड़ सभी वाहनों से बीकन बत्तियां हटाने का निश्चय किया है। इसके लिए संबंधित नियमों में संशोधन होगा।” बहरहाल केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि इस फैसले की अधिसूचना जनता से राय के बाद जारी की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट अनावश्यक लाल बत्तियां हटाने का आदेश दे चुका था। कोर्ट ने 2014 में पुनः लाल बत्ती को स्टेट्स सिंबल बताते हुए कहा था कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों तथा एंबुलेंस, फायर सर्विस, पुलिस तथा सेना को छोड़ किसी को भी लाल बत्ती लगाने की जरूरत नहीं। 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को विशिष्ट व्यक्तियों की सूची में कटौती को कहा था।
जेटली के मुताबिक फैसले के तहत 1998 की मोटर वाहन नियमावली के नियम 108(1-तृतीय) तथा 108(2) में संशोधन किया जाएगा। नियम 108(1-तृतीय) के तहत केंद्र व राज्य सरकारों को वाहनों में लाल बत्ती लगाने योग्य विशिष्ट व्यक्तियों की सूची जारी करने का अधिकार है। जबकि 108(2) के तहत राज्यों को नीली बत्ती लगाने योग्य अधिकारियों की सूची जारी करने का अधिकार दिया।