जिले में तैनात सीआरपीएफ 85 बटालियन नक्सल मोर्चे पर नक्सलियों से लड़ने के अलावा सामाजिक सारोकारिता के क्षेत्र में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, इसी के तहत एक पैर से दिव्यांग मद्देड़ निवासी रिटायर्ड पोस्टमास्टर को 85 बटालियन के कमांडेंट ने आर्टिफिशियल पैर लगाने और इलाज के लिए जयपुर भेजा है।
मद्देड़ निवासी 55 वर्षीय रिटायर्ड पोस्टमास्टर लक्ष्मण दुर्गम ने बताया की 7 अगस्त 2014 को वह अपनी ड्यूटी के दौरान डाक वितरण का कार्य कर घर लौट रहा था तभी नक्सली उसे पकड़कर ले गए और उस पर पुलिस के लिए मुखबिरी करने का आरोप लगाकर कुल्हाड़ी से उसका बांया पैर काट दिया था तब से वे लकड़ी के डंडे के सहारे चल फिर रहे थे। इसी बीच उन्हें इस बात की खबर मिली थी की सीआरपीएफ 85 बटालियन इस तरह लाचार लोगों की मदद करता है। इसीलिए वह 85 बटालियन के मुख्यालय नैमेड़ आए।
जहां से उन्हें जयपुर भेजा जा रहा है। बटालियन के कमांडेंट सुधीर कुमार ने बताया कि इस तरह एक पैर से दिव्यांग लोगों का जयपुर में इलाज किया जाता है और उसके बाद आर्टिफिशियल पैर लगाकर उन्हें दोनों पैरों से चलने फिरने की नई जिंदगी दी जाती है। उन्होंने बताया की उनके साथ देखरेख के लिए उनके जवान साथ जाएंगे और इलाज होने तक साथ रहेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इसके पूर्व उन्होंने नक्सलियों के कहर का निशाना बनकर अपना एक पैर गंवा चूके चेरपाल निवासी सोनू ताती को भी आर्टिफिशियल पैर लगवाया था जिससे वह आज डंडे के बजाय अपने दोनों पैरों से चलफिर पा रहा है।