बीमारी के नाम पर अभियुक्तों को शरण देने वाले अस्पतालों के लिए नसीहत है। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा में गुरुग्राम के ऐसे ही एक प्राइवेट अस्पताल के प्रति सख्त रुख अपनाया है।
कोर्ट ने इस अस्पताल के दो डॉक्टरों को हत्या आरोपी पूर्व विधायक बलबीर उर्फ बाली को गिरफ्तारी से बचाने के लिए अस्पताल में शरण देने पर न्यायालय की अवमानना का दोषी माना है और उन पर 70 -70 लाख रुपये जुर्माना लगाया है। अस्पताल के मालिक डॉक्टर केएस सचदेवा और मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर मुनीश प्रभाकर जून के अंत तक सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में कुल 1.4 करोड़ रुपये जमा कराएंगे।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने दोनों डॉक्टरों को रकम जमा कराने का आदेश देते हुए कहा कि इस रकम को गरीबों की चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने में कैसे खर्च किया जाए इस पर कोर्ट छह जुलाई को सुनवाई करेगा। कोर्ट ने रजिस्ट्री को आदेश दिया है कि जमा कराई गई रकम फिक्स डिपॉजिट की जाएगी।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 24 अक्टूबर, 2013 को हत्या आरोपी पूर्व विधायक बलबीर उर्फ बाली की जमानत रद कर उसे समर्पण करने का आदेश दिया था। बाली ने समर्पण नहीं किया और न ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।
शिकायतकर्ता ने अवमानना याचिका दायर की। कोर्ट के सख्त रुख के बाद एक मई, 2015 को बाली गिरफ्तार हुआ। फिलहाल वह जेल में है। कोर्ट ने 15 दिसंबर, 2016 को बाली और उसे शरण देने वाले दोनों डॉक्टरों को न्यायालय की अवमानना का दोषी ठहराया था। मंगलवार को सजा के मुद्दे पर सुनवाई की।
डॉक्टरों ने बिना शर्त माफी मांगते हुए दया की गुहार लगाई गई। कहा कि वे अस्पताल के 10 फीसद बिस्तर गरीबों के लिए लिए आरक्षित रखेंगे, साथ ही एक साल तक गरीबों को क्लिीनिक सुविधा भी देंगे। दूसरी ओर याचिकाकर्ता के वकील ऋषि मल्होत्रा ने कहा कि अस्पताल का लाइसेंस रद होना चाहिए।
डॉक्टरों पर इतना जुर्माना लगाया जाए कि समाज में संदेश जाए। उन्होंने कहा कि जब कभी नेताओं की जमानत रद होती है तो वे अस्पताल में भर्ती हो जाते हैं। चाहे हरियाणा-पंजाब हो या बिहार सब जगह यही है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनकर कहा कि वह डॉक्टरों को जेल भेजने के इच्छुक नहीं हैं।
उनकी माफी स्वीकार करते हैं, लेकिन उन्हें रकम देनी पड़ेगी जिसका उपयोग गरीबों को चिकित्सा सुविधाएं देने में किया जाएगा। कोर्ट ने शुरुआत में दोनों डॉक्टरों को एक-एक करोड़ रुपये जमा कराने को कहा था, लेकिन बाद में वकील के बार-बार अनुरोध करते पर कोर्ट ने राशि घटाकर 70-70 लाख यानी कुल 1.4 करोड़ कर दी।
बाली को डेढ़ साल तक गिरफ्तार न किए जाने और उसके अस्पताल में भर्ती रहने की कोर्ट ने सीबीआइ जांच कराई थी। जांच में पता चला कि बाली 527 दिन अस्पताल में भर्ती रहा। अदालत ने कहा था कि बिना उचित कारण इतने लंबे समय तक भर्ती रखना और कुछ नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट के जमानत रद करने और ट्रायल कोर्ट के लगातार जारी किए जा रहे गैर जमानती वारंटों को निष्फल करना था।
क्या है मामला
मामला 2011 का है। प्राथमिकी के मुताबिक शिकायतकर्ता सीताराम लाइसेंसी कमीशन एजेंट है और रोहतक कलनौर अनाज मंडी में उसकी दुकान है। 6 मई, 2011 को चंदा मांगने के मामले में हुए झगड़े पर बाली अन्य साथियों के साथ शिकायतकर्ता की दुकान पर पहुंचा और वहां मौजूद विष्णु नामक व्यक्ति को गोली मार दी बाकी लोगों को धमकी देता हुआ भाग गया।