छत्तीसगढ़ के सुकमा में सोमवार को हुए नक्सली हमले में शहीद नारायण सोनकर के परिवार ने सीएम को बुलाने की मांग पर अंतिम संस्कार रोक दिया। उनका कहना है कि जब तक सीएम शिवराज सिंह चौहान नहीं आएंगे तब तक अंतिम विदाई नहीं दी जाएगी। परिवार की इस मांग पर डीआईजी सीआरपीएफ दिनेश त्रिपाठी ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया लेकिन वे अपनी जिद पर अड़े रहे।
सांसद जनार्दन मिश्र द्वारा समझाइश देने के बाद वे अंतिम संस्कार के लिए तैयार हो गए। इसके बाद शहीद की अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में उनके अंतिम दर्शनों के लिए ग्रामीण सड़क के दोनों ओर खड़े हुए थे।
बेटा लेगा पति की मौत का बदला
नारायण की मौत की सूचना मिलने के बाद सुनीता टूटी नहीं बल्कि उन्होंने कहा कि यह उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि उनकी प्रमुख रूप से यह मांग है कि गांव के स्कूलका नाम उनके पति के नाम पर रखा जाए और उनके गांव को तहसील मुख्यालय से जोड़ा जाए। बेटे को सीआरपीएफ में ही नौकरी दी जाए जिससे वह नक्सलियों से अपने पिता की मौत का बदला ले सके।