ओडिशा के बौद्ध जिले में मंकडचुआन गांव के रहने वाले आकाश कुमार मेहर ने सोलर साइकिल बनाई है। इस 24 साल के नवयुवक ने एक ऑटो गियर साइकिल को सोलर पावर से जोड़कर यह कारनामा किया है, जो 25 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है।
बौद्ध को-ऑपरेटिव बैंक का कर्मचारी तपन मेहेर के बेटे आकाश ने भुवनेश्वर स्थित डेब्रे कॉलेज में साइंस की पढ़ाई की थी। वह सिविल सर्विस की तैयारी करने के लिए दिल्ली चला गया था। मगर, बीमार पिता का स्वास्थ्य और खराब होने के कारण उसे वापस लौटना पड़ा।
दिल्ली में रहने के दौरान उसने वहां इलेक्ट्रिक ऑटो रिक्शा देखा था और इसने आकाश के मन में गहरी छाप छोड़ी थी। तब से, वह एक ऑटो गियर साइकिल बनाने के प्रोजेक्ट पर काम कर रहा था।
काफी मुश्किलों के बाद, आकाश ने सोलर पावर से चलने वाली साइकिल बनाने में कामयाबी हासिल कर ली। महज 15,000 रुपए की कीमत पर बनी यह साइकिल 25 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है 150 किलोग्राम तक वजन इसमें लादा जा सकता है। हालांकि, बादल हों और धूप न निकले, तो यह करीब 4 किमी तक ही चलती है।
आकाश अब एक चार पहिया सोलर विहिकल डेवलप करना चाहता है। मगर, इसके लिए उसके पास पर्याप्त पैसे नहीं हैं। उसने सरकार और गैर-सरकारी संगठनों से आग्रह किया कि वे आगे आएं और उसके इस इनोवेशन में मदद करें।
हाल ही में महाराष्ट्र के किसानों की रैली में भी ऐसा ही एक वाक्या देखने को मिला था। प्रदेशभर के किसान अपनी मांगों को पूरा करने का आंदोलन करने के लिए मुंबई में पहुंचे थे। यहां लक्ष्मण नाम का किसान भी नासिक से मुंबई पहुंचा था।
सात दिनों तक चिलचिलाती धूप में पैदल चलने के कारण पैरों में छाले पड़ गए थे। वे आंदोलन के लिए अपने साथ खाने पीने और अन्य जरूरी चीजों को लेकर पहुंचे थे। मगर, फिर भी एक समस्या थी, जिसका कोई आसान हल नहीं दिख रहा था।
वह था फोन को चार्ज करने के लिए बिजली की जरूरत। फोन आज लक्जरी की चीज नहीं, बल्कि जरूरत का सामान हो गया है। मगर, जहां चाह होती है, वहां राह भी निकाल ही ली जाती है। त्रयंबकेश्वर तालुका के रहने वाले लक्ष्मण ने लोगों को जुगाड़ सिखा दिया। वह अपने सिर पर सोलर पैनल बांध कर आए थे।
इससे एक तरह उन्हें सिर पर धूप लगने से बचाव मिल रहा था। वहीं, सोलर चार्जर से पैदा होने वाली बिजली से वह अपने और साथ के लोगों के मोबाइल भी चार्ज करने में मदद कर रहे थे। सच में किसानों में हर परिस्थिति से निपटने का जो माद्दा है, वह काबिले तारीफ है।
उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने हाल ही में कहा था कि सतत विकास के लिए पर्यावरण को सुरक्षित रखना जरूरी है। विश्व के लिए भारत में अक्षय ऊर्जा का बड़ा बाजार है। भारत में दिसंबर तक अक्षय ऊर्जा का उत्पादन 62.846 मेगावॉट हो चुका है। यह देश की कुल ऊर्जा जरूरत का 18.8 फीसद है। उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने व जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए इलेक्ट्रिक व हाइब्रिड वाहन अगले कुछ वर्षों में आने वाले हैं।
नायडू ने कहा कि सरकार ने इस बात को ध्यान में रखते हुए नेशनल इलेक्ट्रिसिटी मोबिलिटी मिशन लांच किया है। 2020 तक साठ से सत्तर लाख इलेक्ट्रिक व हाइब्रिड वाहन उपलब्ध होंगे। घरेलू उद्योग के लिए बैटरी उत्पादन में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि 2016-17 में देश से 39280 करोड़ के विद्युत उपकरणों का निर्यात व 55290 करोड़ रुपए का आयात किया गया।