उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त ने मायावती के नेतृत्व वाली पिछली बहुजन समाज पार्टी सरकार के दौरान बनाए गए दलित नेताओं के स्मारकों के निर्माण में एक हजार चार सौ करोड़ रुपये का दुरूपयोग पाया है। लोकायुक्त न्यायमूर्ति एन. के. महरोत्रा ने बताया कि दो पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दिकी और बाबू सिंह कुशवाहा इस घोटाले के प्रमुख आरोपी हैं और इन दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।लोकायुक्त की इस रिपोर्ट में जहां बसपा शासनकाल के कद्दावर मंत्रियों नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बाबूसिंह कुशवाहा को मुख्य आरोपी बनाया गया है, वहीं तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ इस मामले में कोई भी सबूत नहीं मिले हैं। रिपोर्ट में दो पूर्व मंत्रियों, ६२ अभियंताओं, एक वर्तमान एमएलए, दो वकीलों, चालीस राज्य कर्मचारियों और सप्लाई फर्मों के ६० प्रतिनिधियों पर हेराफेरी का इल्जाम लगाया गया है। मामले के मुख्य आरोपी नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर जहां आय से अधिक संपत्ति के कई मामले पहले से ही चल रहे हैं, वहीं बसपा से अब निकाले जा चुके बाबूसिंह कुशवाहा एनआरएचएम घोटाला मामले में जेल में बंद हैं।