बम्बई उच्च न्यायालय ने प्रमुख तेल कम्पनी शेल इंडिया पर 18 हजार करोड़ रूपए कर लगाने का आयकर विभाग का आदेश निरस्त कर दिया। न्यायमूर्ति एम.एस. संकलेचा और न्यायमूर्ति एस सी गुप्ते की पीठ ने यह आदेश दिया।
आयकर विभाग का आकलन था कि शेल इंडिया ने विदेश में स्थित अपनी मूल कम्पनी को बाजार भाव से बहुत कम दाम पर शेयर बेचे थे। आयकर विभाग ने इसे ट्रांसफर प्राइसिंग का मामला बताया, जिसमें सहायक कंपनी ने मूल कंपनी को दिये गये शेयरों का दाम बहुत कम तय किया। उच्च न्यायालय ने आयकर विभाग का तर्क खारिज कर दिया।