केन्द्र की एनडीए सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना-मनरेगा के तहत सूखा प्रभावित क्षेत्रों में काम करने के दिन एक सौ से बढ़ाकर डेढ़ सौ करने का फैसला किया है। मनरेगा के तहत देश भर में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को हर साल एक सौ दिन का रोजगार दिया जाता है। अतिरिक्त पचास दिनों के रोजगार के बदले दिये जाने वाले पारिश्रमिक का खर्चा केन्द्र सरकार उठाएगी और यह सुविधा केवल उन्हीं परिवारों को मिलेगी जो एक सौ दिन पूरे करेंगे। सरकार को लगता है कि सूखे के कारण कुछ क्षेत्रों में खेती के कामों पर असर पड़ेगा और दिहाडी आधारित रोजगार की मांग बढ़ेगी। इसीलिए सूखा प्रभावित क्षेत्रों में मनरेगा के तहत दिहाडी के दिनों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया गया है।