कालेधन पर अंकुश को लेकर केंद्र सरकार कितनी सजग है इसका अंदाजा आप इश बात से लगा सकते हैं कि अब नोटबंदी से पहले बैंकों में 2.5 लाख रुपए से अधिक की अघोषित आय जमा करने वाले मुसीबत में फंस सकते हैं।
वित्त मंत्रालय ने बैंकों और डाकघरों से 1 अप्रैल, 2016 से 9 नवंबर, 2016 तक 2.5 लाख से अधिक जमा वाले बचत खातों और 12.5 लाख से अधिक डिपॉजिट वाले चालू खातों की जानकारी मांगी है। गौरतलब है कि नोटबंदी का फैसला बीते 8 नवंबर को लिया गया था।
दरअसल वित्त मंत्रालय ने उन सभी खातों के बारे में जानकारी मांगी है, जिनमें नोटबंदी के बाद भी 2.5 लाख या 12.5 लाख से अधिक की राशि जमा हुई है। मंत्रालय के इस आदेश के बाद आयकर विभाग ने 2.5 लाख से अधिक डिपॉजिट वाले सेविंग अकाउंट्स के बारे में बैंकों से कैश डिपॉजिट की डिटेल मांगी है।
मंत्रालय के मुताबिक बैंकों से मिले डेटा का इस्तेमाल तुलनात्मक अध्ययन के लिए किया जाएगा। इससे इन खातों की डिपॉजिट हिस्ट्री की जानकारी मिल सकेगी।
वित्त मंत्रालय ने बैंकों और डाकघरों में बचत खाताधारकों से 28 फरवरी तक पैन नंबर या फॉर्म 60 जमा कराने के लिए कहा है। यह आदेश उन खाताधारकों के लिए है, जिन्होंने अपने अकाउंट के लिए पैन नंबर नहीं दिया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है।
हालांकि यह डिटेल जमा कराना उन लोगों के लिए अनिवार्य नहीं है, जिनका बेसिक सेविंग बैंक डिपॉजिट अकाउंट है। सरकार का मानना है कि बैंकों में पैन नंबर अनिवार्य किए जाने से काले धन पर लगाम लग सकेगी।